Wednesday, October 17, 2018
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स्वच्छता पर जोर

देश के प्रधानमंत्री के आहवाहन पर पूरे देश में मनाये जा रहे स्वच्छता पखवाड़े से स्वच्छ भारत अभियान को काफी गति मिलती दिख रही है। साफ-सफाई को विशेष बल देने वाले सरकारी कार्यक्रमों से आम लोगों की जागरूकता में एक ओर कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी पिछले तीन वर्षों में स्वच्छता और साफ-सफाई को लेकर काफी जागरूक हुए है लेकिन यह कहना उचित ही होगा कि कई जगहों पर यह कार्यक्रम फोटो खिचाऊ अभियान तक ही सीमित है। महानगरों में तमाम नजारे आज भी दिखते हैं जो पीएम के स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में गांधी जयंती के अवसर पर इस महत्वाकांक्षी अभियान का शुभारंभ किया था। सुरक्षित पेयजल और साफ-सुथरे शौचालय के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है और इससे स्वच्छता को एक नया अर्थ मिला है। लेकिन शौचालय योजना जहां एक ओर लोगों को खुले में शौच करने से बचाव का माध्यम बनी है तो दूसरी ओर शौचालय योजना में भी भ्रष्टाचाररूपी ईंटगारे का बोलबाला दिख रहा है और यह योजना भी जेब भरने का माध्यम बनती दिखी है।
शौचालय अभियान के तहत बड़ी संख्या में शौचालयों का निर्माण हुआ है। फिर भी यह कहना अनुचित नहीं कि जो परिणाम आने चाहिए वो लाख प्रयासों के बावजूद नहीं आये क्योंकि कागजी हकीकत कुछ और है और जमीनी हकीकत कुछ और। हालांकि स्वच्छता के प्रति यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्वच्छता का एक निश्चित स्तर हासिल करने से 50 हजार रूपये प्रति वर्ष प्रति परिवार बचाये जा सकते है। इसी लिए सार्वभौमिक स्वच्छता को गति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की है। इस मिशन का उद्देश्य 2019 तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उनका मानना है कि यह महात्मा गांधी के 150वीं जयंती पर एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। लेकिन यह अभी दूर की कौड़ी से कम नहीं दिखता। वहीं अधिकारियों के अनुसार एसबीएम की शुरूआत के समय देश में स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 67.5 प्रतिशत हो गई है। 2.38 लाख गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्ति’ के अंतर्गत लाया जा चुका है और इस उपलब्धि को स्वतंत्र एजेंसियों ने भी अनुमोदित किया है। लेकिन ओडीएफ घोषित गावों की वास्तविक हकीकत भी कुछ अलग ही है, कागजी तौर पर कुछ अलग। ताजा आंकड़ों के अनुसार एसबीएम ने कई लक्ष्य हासिल कर लिये है। 29,79,945 घरेलू शौचालयों का निर्माण हुआ है। घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने की व्यवस्था 44,650 वाॅर्डों में शत-प्रतिशत रूप से की गई है।
इसी क्रम में स्वच्छ भारत अभियान को नई ऊर्जा देने और इसे जनांदोलन बनाने के लिए ‘स्वच्छता ही सेवा’ नाम से इस पखवाड़े के दौरान स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अभियान का उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से शुभारंभ किया और स्वच्छता पखवाड़े की समाप्ति गांधी जयंती के दिन होगी। स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत समाज के सभी क्षेत्रों के लोगों की श्रमदान के प्रति सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों और पर्यटन स्थलों में सफाई अभियान चलाये जा रहे हैं लेकिन इस अभियान का सार्थक असर अभी दूर दिख रहा है। क्योंकि लोग अपनी आदतों को बदलना नहीं चाह रहे हैं।