Monday, September 23, 2024
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विचार, व्यवहार और आचरण में मर्यादा के कायल थे चंद्रशेखर : उपराष्ट्रपति

New Delhi: उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि “आज जब सिद्धांतनिष्ठ राजनीति का चिंतनीय ह्रास हो रहा है, मुझे विश्वास है कि युवा पीढ़ी के राजनेता और सांसद, चंद्रशेखर जी के जीवन से प्रेरणा लेंगे।” उन्होंने बल देते हुए कहा कि ” आज यह आवश्यक है कि लोग ऐसे व्यक्तित्व और कृतित्व से प्ररेणा लें जिसने बदलती राजनीति में भी अपने राजनैतिक विचारों, विश्वासों, सिद्धांतों का समझौता नहीं किया।”
आज संसद परिसर स्थित बालयोगी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश तथा श्री रवि दत्त वाजपेई द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी पर लिखी पुस्तक ” Chandra Shekhar- The Last Icon of Ideological Politics” की पहली प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से साभार स्वीकार करते हुए, राज्यसभा के सभापति श्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि “मेरे लिए और राज्य सभा के प्रत्येक सदस्य के लिए यह गौरव और हर्ष का विषय है कि चंद्रशेखर जी ने, 1962 में, 35 साल की युवा आयु में ही अपना संसदीय कैरियर, वरिष्ठों के सदन, राज्य सभा से प्रारंभ किया।”
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सामान्य परिवार में जन्मे एक ऐसे लोकप्रिय राष्ट्रीय जननेता का जीवन वृत्त है जिसके पास न कोई वंशानुगत राजनैतिक पृष्ठभूमि थी, न विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के अवसर, न समृद्ध वंश के संसाधन और न ही वर्ग, जाति, धर्म पर आधारित वोट बैंक। चंद्रशेखर जी के राजनैतिक आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि “चंद्रशेखर जी हमेशा मानते थे कि राजनीति हाशिए पर खड़ी जनता की सेवा का माध्यम है, सिर्फ सत्ता मात्र प्राप्त करने का साधन नहीं।”
उपराष्ट्रपति ने श्री चन्द्रशेखर द्वारा स्थापित संसदीय आचरण के उच्च मानदंडों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि चंद्रशेखर जी सदैव विचार, व्यवहार और आचरण में मर्यादा के कायल रहे। वरिष्ठों और सहयोगियों के प्रति आदर, कनिष्ठों के प्रति स्नेहिल सद्भाव, आचरण में मर्यादित सौम्यता और बराबरी का व्यवहार, चंद्रशेखर जी की जीवन शैली की नैसर्गिक प्रवृत्ति रहे। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर जी न केवल आदर्शों और विचारधारा पर आधारित राजनीति के हिमायती थे, उन्होंने विचार के साथ आचार और आचरण की मर्यादा का सदैव पालन किया।
आपातकाल के दौरान हुए अधिकारों के हनन की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने उस अवधि में श्री चंद्रशेखर की महत्वपूर्ण भूमिका का ज़िक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि व्यक्ति – परस्त तानाशाही के विरूद्ध जेल जाने वाले महत्वपूर्ण नेताओं में चंद्रशेखर भी थे जो उस समय सत्ताधारी दल में ही थे।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने चन्द्रशेखर जी की कन्याकुमारी से राजघाट तक की पदयात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि चन्द्रशेखर सदैव आम आदमी की ज़मीनी सरोकारों से जुड़े रहे।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के व्यक्तित्व और कृतित्व को दर्शाने के लिए एक संग्रहालय के निर्माण की घोषणा का स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला, राज्य सभा में विपक्ष के नेता, श्री गुलाम नबी आजाद, राज्य सभा के उपसभापति और पुस्तक के लेखक श्री हरिवंश तथा अनेक मंत्री, सांसद एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।