बदलते आधुनिक परिपेक्ष में नई सकारात्मक वैचारिकता का धारण करना समय की मांग – जो समय को छोड़ देते हैं समय उनको छोड़ देता है!!! – एड किशन भावनानी
गोंदिया – भारतीय संस्कृति, सभ्यता और हमारे पूर्वजों, बड़े बुजुर्गों की वैचारिकता, सोच, कहावतें, प्रेरणा, मार्गदर्शन, हमारे लिए अनमोल धरोहर ही नहीं एक अणखुट ख़जाना भी है!!! अगर हम अपनी संस्कृति, सभ्यता और पूर्वजों, बड़े बुजुर्गों की वैचारिक को ग्रहण कर उनकी बताई राहों, उनके द्वारा कही कहावतों पर गहराई से सोचें तो हमें एक-एक शब्द या लाइन में बहुत बड़ी सीख, प्रेरणा, मार्गदर्शन मिल सकता है जो उम्र का तकाज़ा, समय का तकाज़ा, समय बड़ा बलवान रे भैया समय बड़ा बलवान, मुख में राम बगल में छुरी, आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है, इत्यादि ऐसे अनेक सुने अनसुने शब्द कहावतें हैं जिनकी गहराई में जाकर उनका सकारात्मक मतलब निकाल कर हम बुराई से बच सकते हैं और मूल्यवान शब्दों को अपनाकर अपना जीवन संवार सकते हैं।
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Jansaamna
बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए शिक्षकों के साथ अब अभिभावकों को भी अपना पूर्ण योगदान देने की आवश्यता है
एक कहानी पढ़ी थी कि बहेलिये ने दाना डालकर जाल बिछाया हुआ था और फिर कबूतर दाना चुगने आए और जाल में फस गए। हमें इस कहानी से यह सबक सिखाया जाता था की लालच बुरी बला है। कुछ ऐसा ही आजकल का माहौल है करोना काल में शुरू की गई गरीबों के लिए मुफ्त राशन योजना को केंद्र सरकार ने तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है हालांकि यह स्पष्ट है कि यह घोषणा 2024 में लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखकर किया गया है। इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री की शपथ के अगले ही दिन कर दी गई और दावा किया गया है कि पंद्रह करोड़ लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
इश्क की आँधी बहा ले जाती है जिनको कच्ची उम्र के पड़ाव पर, वह लड़कियां कहीं की नहीं रहती। छूट जाती है पढ़ाई और इश्क की आराधना करते कई बार हार जाती है अपनी ज़िंदगी।
खाने-पीने की चीजों से लेकर जिस तरह पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है, वह चिंता की एक बड़ी वजह है। इसके लिये कहीं न कहीं केंद्र और राज्य सरकारों का मुनाफाखोर आचरण पूरी तरह से जिम्मेदार है। पांच राज्यों में सम्पन्न हुए चुनावी दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी ना करने के पीछे मतदाताओं की नाराजगी से बचने हेतु एक मजबूरी थी और जैसे ही नतीजे आ गये, मतलब निकला तो मंशा उजागर हुई और परिणामतः पेट्रोलियम पदार्थाे में लगभग हर रोज बढ़ोत्तरी जारी है।
चीन के कर्ज में फंसे श्रीलंका के हालात दिन प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं। पूरे देश में खाद्य सामग्री का संकट इतना गहरा हो गया है कि जनता के लिए अपना पेट भरना मुश्किल हो गया है। गौरतलब यह है कि चीन सहित अनेक देशों के कर्ज तले दबा श्रीलंका अब दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है। उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी अधिक घट गया है। इस कमी के कारण देश में ज्यादातर सामानों सहित दवाइयां, पेट्रोल व डीजल आदि का विदेशों से आयात नहीं हो पा रहा है। इस कारण मंहगाई की मार से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। ताजा हालातों की बात करें तो एक ब्रेड का पैकेट 0.75 डॉलर यानि कि 150 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। इसी तरह सब्जियों के दाम भी आसमान पर पहुंच गए हैं। श्रीलंका में इन दिनों एक किलोग्राम चीनी 290 रुपये, एक किलोग्राम चावल 500 रुपये, 400 ग्राम मिल्क पाउडर 790 रुपये, एक लीटर पेट्रोल 254 रुपये, एक लीटर डीजल 176 रुपये एवं रसोई गैस का सिलेन्डर 4149 रुपये में मिल रहा है।
‘द कश्मीर फाइल्स’ एक ऐसी फ़िल्म है, एक ऐसी सत्य कथा है जिसे हर हिन्दुस्तानी को देखनी चाहिए। देश की बहुत सारी जनता इस जघन्य कृत्य से अन्जान है। इस फ़िल्म को देखने वाले दर्शकों को फ़िल्म का कथानक सदियों तक याद रहेगा। 19 जनवरी 1990 के दिन कश्मीर के इतिहास का सबसे काला अध्याय लिखा गया। अपने ही घर से कश्मीरी पंडितों को बेदखल कर दिया। सड़कों पर नारे लग रहे थे, ‘कश्मीर में अगर रहना है, अल्लाहू अकबर कहना है’। और अफ़सोस की बात ये है की उस वक्त की स्थानीय सरकार पंगु थी। द कश्मीर फ़ाइल्स इसी कथानक पर आधारित फ़िल्म है जिसमें अनुपम खेर की एक्टिंग की तारीफ़ में शब्द ही नहीं। 90 के दशक में कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं के नरसंहार और पलायनवाद की कहानी को दर्शाया गया है। इस फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती जैसे धुरंधर कलाकार के साथ फिल्म में पल्लवी जोशी और दर्शन कुमार जैसे मंझे हुए कलाकारों ने एक छाप छोड़ी है।
सोवियत संघ के समय मित्र रहे दो प्रान्त रूस और यूक्रेन के बीच जबर्दस्त जंग छिड़ी हुई है। जिसमें यूक्रेन को भारी क्षति उठानी पड़ रही हैद्य इस युद्ध का शिकार अब न केवल निर्दाेष और निहत्थे यूक्रेनी हो रहे हैं बल्कि वहाँ रहने वाले भारत सहित अन्य देशों के नागरिकों की भी जान जोखिम में पड़ी हुई है। रुसी हमले में एक भारतीय छात्र की हुई मृत्यु ने यूक्रेन में रह रहे अपने नागरिकों के प्रति भारत सरकार की चिन्ता बढ़ा दी है।
आजकल देश और दुनिया में एक ही बात की चर्चा हो रही है कि क्या अब रूस दुनिया का नया शहंशाह बनने वाला है, क्या अब अमेरिका और यूरोप की बादशाहत खत्म होने वाली है? एक भविष्यवाणी के अनुसार पुतिन अब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बनने वाले हैं, और रूस दुनिया पर राज करेगा। पर किसीने सोचा है की इस बादशाहत उनको किस कीमत पर मिलेगी। कितने परिवारों को अनाथ करके, कितने लोगों को तबाह करके और कितने खून और आँसूओं की नदियाँ बहेगी तब युद्ध ख़त्म होगा, फिर कितने सारे मकबरों पर पुतिन अपनी बादशाहत का महल खड़ा करेंगे।