Saturday, September 12, 2026
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हरियाली से भरा केरल राज्य

कभी-कभी सोचती हूं सुंदरता की तुलना किसी भी चीज से नहीं होनी चाहिए। सुंदरता अपनी आंखों में होती है और उसे महसूस करने में होती है। हर चीज या हर सुंदर चीज अपने आप में बहुत सुंदर है। हरे-भरे पेड़-पौधे, घाटियां, पहाड़, जंगल, ये सब नैसर्गिक सुंदरता है। उनकी तुलना हम किसी देश या स्थान की सुंदरता से नहीं कर सकते हैं। जहां भी ये आपको दिखेंगे, प्राकृतिक सौंदर्य और आत्मिक सुख का एहसास करवाएंगे।

यूं केरल बहुत बड़ा राज्य है, जिसे एक बार में घूम पाना मुश्किल है। यदि आप एक बार में घूम भी रहे हैं तो 15 से 20 दिन का समय जरूर चाहिए। हमारी केरल की यात्रा में कोच्चि, ऐलप्पी और मुनार शामिल थे, तो हमारी यात्रा कोच्चि से शुरू हुई।

 

कोच्चि से 80 किलोमीटर दूर मुनार से पहले अडीमाली जगह पर हम रुके। रास्ते में अडीमाली वाटरफॉल देखते हुए होमस्टे पहुंचे। थकावट बहुत ज्यादा थी और बारिश भी बहुत थी, तो उस दिन तो हमने आराम किया और अगले दिन का प्रोग्राम सेट किया। अगली सुबह नौ बजे हम अपने होमस्टे से निकल गए। हमारा सबसे पहला पड़ाव मुनार का रहा। मुनार पहुंचने में करीब एक घंटे जैसा समय लगा। पहाड़ी रास्ता और बारिश भी थी, तो सेफ ड्राइविंग बहुत जरूरी थी। सो खूबसूरत पहाड़ियों और घाटियों के नजारों का आनंद लेते हुए हम आगे बढ़ते जा रहे थे।

सबसे पहले हम एराविकुलम नेशनल पार्क पहुंचे, जो मुनार से 15 किलोमीटर दूर था। वहां एक जंगली बकरी (नीलगिरी तहर) को प्रकृति में विचरते हुए करीब से देख सकते हैं। मुझे उनके पास जाते हुए डर लगा, लेकिन मासूम जानवरों ने बहुत प्यार से फोटो सेशन करवाया। लगातार बारिश के कारण मौसम बेहद खूबसूरत था। हमने गहरी घाटियों के नजारों का आनंद लिया, साथ ही बारिश का मजा लिया।

कुछ वक्त वहां बिताने के बाद हम लोग चाय का बागान देखने गए। चाय के बागान एक लाइन से लगे हुए थे, जोकि बहुत सुंदर और हरियाली बिखेरे हुए थे। चाय के बागान से होते हुए हम टी म्यूजियम गए, जहां पर हमने चाय कैसे बनती है, उसकी प्रक्रिया और चाय कितने हिस्सों में बंटती है, साथ ही उसकी क्वालिटी भी कैसे घटती-बढ़ती है, यह भी देखा और समझा। मुनार की जलवायु चाय की खेती के लिए बहुत अनुकूल है, इसलिए यहां पर चाय के बागान मौजूद हैं और यह आम लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। इसलिए बागानों के आसपास कई गांव बसे हुए हैं।

उसके बाद गैप रोड गए। घुमावदार सड़क, घाटियां, पहाड़ और छलकते बादल। जी हां, छलकते बादल, वह बादल जो पानी की बूंदों में होते हैं और जिसे हम महसूस करते हैं और उनमें भीगते हैं। एक ऐसी जगह, जहां कभी आपके पास समय हो तो आप कुछ वक्त जरूर गुजारना चाहेंगे।

मेरे लिए सबसे सुखद और आश्चर्य भरा कलार स्पाइस गार्डन रहा। इलायची, लौंग, ब्राह्मी, चॉकलेट, दालचीनी, पुनर्नवा, भृंगराज, ब्राह्मी और भी पता नहीं कितने तरह के पेड़-पौधे देखे। आयुर्वेदिक दवाइयां और सबसे अच्छा आयुर्वेदिक मसाज, जिसे आधुनिक भाषा में स्पा कह सकते हैं। आयुर्वेदिक मसाज, जो शरीर के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है, उसका अनुभव एक बार जरूर किया जाना चाहिए।

कथककली और कलारी शो देखा, जोकि बहुत सुंदर था। राधा-कृष्ण का भाव लिए हुए नृत्य, यशोदा मां का रूठना, कृष्ण का नटखटपन, अर्जुन को गीता उपदेश नृत्य के जरिए प्रस्तुत किया गया, जोकि वास्तव में बहुत सुंदर था।

मुनार घूमना काफी दिलचस्प रहा। सबसे ज्यादा मजा जीप सफारी में आया। ग्रीनरी इतनी सुंदर तरीके से डिजाइन की गई है कि उसे देखते हुए आंखें नहीं थकतीं। इलायची के पौधे, केले और नारियल के पेड़ तो हर जगह देखने को मिलते हैं। वॉटरफॉल भी जगह-जगह दिखाई देते हैं।

हम रिप्पल वॉटरफॉल गए, तो वहां पानी का शोर बहुत था। धीरे-धीरे चलते हुए वॉटरफॉल के पास गए। उसका अपना शोर ही बहुत आंदोलित कर रहा था। मैं हमेशा की तरह फोटोशूट में लग गई। इन सुंदर पलों को मैं अपनी आंखों और कैमरे में कैद कर लेना चाहती थी।

हैंगिंग ब्रिज का अपना ही मजा है। उस पर चलते हुए वह ब्रिज हिलने-डुलने लगता था। मजा भी आता था और थोड़ा सा डर भी लगता था। हैंगिंग ब्रिज की जगह शांत थी और वहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। ब्रिज से नीचे बहती नदी और छोटे झरने थे, ऊपर फैली हुई हरियाली से भरा हुआ जंगल था। वो एक शांत और सुकून भरा एहसास था।

पोनमुडी डैम काफी ऊंचाई पर स्थित है, जिसे “गोल्डन पीक” भी कहा जाता है। यह अपने घुमावदार रास्ते, शानदार जंगल और घाटियों के लिए जाना जाता है। जहां ऊंचाई पर से प्रकृति का सुंदर नजारा देखने का आनंद कुछ और है। उसके बाद हम शूटिंग प्वाइंट या फोटो प्वाइंट कह सकते हैं। यहां चाय के बागानों, जंगल की हरियाली, छोटे झरने और पहाड़ियां, इन सबके साथ समय बिताने और इन पलों को कैमरे में कैद करने के लिए बहुत सुंदर जगह है। ऐसा कहते हैं कि चेन्नई एक्सप्रेस की शूटिंग यहीं पर हुई थी।

उसके बाद हम नडुकानी माउंटेन व्यू प्वाइंट गए। यह समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर है। यहां से झरने और आसपास की घाटियां, नदी, शहर के नजारे, घाट, इन सबको ऊंचाई से देखने का आनंद कुछ और है। लोग ट्रैकिंग के लिए भी यहां पर आते हैं। प्रकृति प्रेमी और ट्रैकिंग के शौकीन लोगों के लिए यह जगह बहुत शानदार है।

केरल अपने साउथ इंडियन फूड के लिए बहुत प्रसिद्ध है। केरल थाली और स्नैक्स बहुत शानदार हैं। वैसे यहां पर नॉनवेजिटेरियन पब्लिक ज्यादा दिखाई देगी।

 

हमारा अगला पड़ाव मुनार के बाद एलेप्पी था। एलेप्पी, जिसे “पूर्व का वेनिस” भी कहते हैं, खूबसूरत शिकारा राइड और अपने बीच (समुद्र तट) के लिए प्रसिद्ध है। हमने पहले ही दिन शिकारा राइड किया। तीन-चार घंटे कहां बीत गए, हमें मालूम ही नहीं पड़ा। इसी दौरान हमने स्पीड बोट की भी राइड ली, जोकि काफी रोमांचकारी थी। गाना और मजा-मस्ती के बीच समय कहां निकल गया, मालूम ही नहीं पड़ा। पारंपरिक केरल का खाना केले के पत्ते पर बहुत ही शानदार लगा, साथ ही खाने का स्वाद भी बहुत जबरदस्त था।

मरारी बीच, जहां शांति और सुकून दोनों है। मछुआरों को मछली पकड़ते देखना और कुर्सी पर बैठकर लहरों को देखना और ढलता हुआ सूरज और सुरमई शाम माहौल को एकदम रोमांटिक बना देती है।

अलाप्पुझा, जहां हमने लाइट हाउस देखा, जो ब्रिटिश के वक्त की याद दिलाता है। उसके बाद हमारी वापसी कोच्चि हुई।

कोच्चि में ‘फोर्ट कोच्चि’ का प्रसिद्ध समुद्र तट देखा, जहां “चाइनीज फिशिंग नेट” और समुद्र तट का व्यू प्वाइंट देखा। मट्टनचेरी स्थित “ज्यू टाउन” देखा, जो अपनी एंटीक चीजों के लिए जाना जाता है। रविवार के कारण डच पैलेस और सेंट फ्रांसिस चर्च देखना रह गया। वहां का पारंपरिक फूड “सरवाना भवन” में खाना खाया। कुल मिलाकर हमारी यह केरल यात्रा काफी मजेदार रही।

✒️ प्रियंका वर्मा माहेश्वरी, गुजरात