कविता पंत: नई दिल्ली। देश की राजधानी में 12 और 13 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और इसमें भाग लेने वाले विश्व नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचने लगे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कल रात तीन दिन की यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। पुतिन के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति पुतिन के साथ विस्तृत वार्ता की, जिसमें 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने और रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में मौजूदा सहयोग को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
पुतिन के पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद बैठक हुई। वार्ता के बाद, दोनों नेता भारत मंडपम परिसर के अंदर एक ही कार में सवार होकर आयोजन स्थल पर पहुंचे। यूक्रेन में फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस के बाहर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी यह पहली प्रत्यक्ष भागीदारी है। इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले शीर्ष नेताओं में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, उनके इंडोनेशियाई समकक्ष प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं।
शी जिनपिंग सात वर्ष बाद भारत आ रहे हैं। शी जिनपिंग के साथ 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल होगा, जिसमें राजनीतिक दिग्गज और उनके खास करीबी माने जाने वाले सीपीसी पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई क्यूई और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं। राष्ट्रपति के इस दौरे के लिए एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अलग से आ रहा है। वह कल यहां पहुंचेंगे। शी जिनपिंग शनिवार को दोपहर करीब 2 बजे भारत मंडपम पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री मोदी उनका और अन्य नेताओं का स्वागत करेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक शाम को होगी। वह ब्रिक्स के नेताओं के सम्मान में मोदी द्वारा शाम को आयोजित रात्रिभोज में भी शिरकत करेंगे।
शी जिनपिंग की इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह प्रगति 2024 में कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की हुई बैठक के बाद बनी है, जिसमें पूर्वी लद्दाख में 2020 के सैन्य गतिरोध से संबंधित मुद्दों के पूर्ण समाधान और सैनिकों की वापसी पर सहमति बनी थी। उम्मीद है कि मोदी इस बैठक में निष्पक्ष बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता और द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन को लेकर भारत की चिंताओं पर जोर देंगे, क्योंकि दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं।
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय ने विएरा के आगमन की घोषणा करते हुए कहा कि वे शिखर सम्मेलन में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, क्योंकि लूला अपने चुनाव प्रचार के लिए ब्राजील में ही हैं। ब्रिक्स में दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती 11 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं- रूस, चीन, भारत, ब्राज़ील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से, जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस समूह का पूर्ण सदस्य बना। यह वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों पर परामर्श और सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच के रूप में कार्य करता है।
भारत के लिए इस बार संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि विस्तारित ब्रिक्स समझौते में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों शामिल हैं, जिनके बीच संघर्ष जारी है। साथ ही भारत के वाशिंगटन और खाड़ी देशों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक संबंध भी हैं। भारत इससे पहले भी वर्ष 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता और बैठकों की मेजबानी कर चुका है। भारत ने इस वर्ष मई में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की थी। इस बार यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता का दौर है।
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