कार्यालय के उद्घाटन और कार्यकर्ताओं से मिलने में ही बिताया सारा वक्त
ऊंचाहार/रायबरेली ,पवन कुमार गुप्ता। भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी मशक्कत के बाद चौथे चरण की जनपद रायबरेली में ऊंचाहार विधानसभा की सीट पर तीन दिन पूर्व ही अपना अंतिम निर्णय दे दिया था। जिसमें पार्टी ने प्रत्याशियों की मजबूती के साथ ही क्षेत्र के मौजूदा राजनैतिक हालात का भी पूरा ध्यान रखा है। लेकिन देखा जाए तो पार्टी ने अपने पुराने कार्यकर्ताओं और कद्दावर नेताओं को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में दरकिनार किया है जिसका अच्छा खासा उदाहरण ऊंचाहार विधानसभा की सीट पर देखने को मिल रहा है जहां पर कई जमीनी कार्यकर्ताओं के होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने ऊंचाहार विधानसभा की सीट पर एक गैर जनपदीय पार्टी कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाकर उतार दिया है जो कि जनता के लिए अभी तक अनजान है। हालांकि प्रत्याशी अमर पाल मौर्य ने नामांकन के अंतिम दिन विधानसभा ऊंचाहार की सीट के लिए पर्चा भर दिया है लेकिन अभी तक जनता से मुखातिब नहीं हो सके हैं। उनके अभी तक के शेड्यूल में क्षेत्र में निचले तबके के व्यक्ति तक पहुंचने का कोई कार्यक्रम तय नहीं हो सका है सोशल मीडिया की पोस्ट से ही उनके चेहरे की झलक लोग देख पा रहे हैं बल्कि आज के कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र के कई मुख्य चौराहों पर उनके द्वारा कार्यालय का उद्घाटन किया गया और जनसंपर्क और स्वागत कार्यक्रम भी हुआ जिसमें अच्छी खासी भीड़ भी इकट्ठी हुई और लोगों ने उनको देखा और उनकी बातों को सुना लेकिन अभी भी क्षेत्र की संपूर्ण जनता से उन्हे जुड़ना होगा जिसके लिए उन्हें खुद उनके दरवाजे पर जाना होगा। फिरहाल इन दो दिनों में भाजपा प्रत्याशी अमरपाल मौर्य केवल कार्यालय का उद्घाटन और कार्यकर्ताओं से ही मिलते रहे ।
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Jansaamna
ऊंचाहार/रायबरेली,पवन कुमार
वैश्विक स्तरपर सदियों पुरानी भारतीय परंपरागत संगीत की चाहत और प्रतिष्ठा आज भी अनेक देशों में कायम है और उसे देखने, उसका अध्ययन करने, अनेक सैलानी भारत यात्रा करते हैं। हमने कई बार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और टीवी चैनलों पर देखे होंगे कि विदेशी सैलानी अनेक प्रदेशों में वहां के पारंपरिक संगीत पर नाचते झूमते हैं और बहुत खुश, संतुष्ट नज़र आते हैं। यह देखकर हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है और हम गौरवविंत होते हैं कि हम भारत देश के नागरिक हैं!!!
नई दिल्ली।
नई दिल्ली।
रायबरेली।
पर हर परिस्थिति का सामना करते जो ज़िंदादिली से जिए उसे मिडल क्लास परिवार कहते है। मिडल क्लास यानी मध्यम वर्गीय परिवार जो ताउम्र मुसीबतों का मारा ही रहता है, ज़िंदगी जिसे छोड़ देती है दो पाटन के बीच पिसने के लिए। न वो अमीर की श्रेणी में आता है न गरीब कहलाता है, न वो आरक्षण का हकदार होता है न बड़ी लाॅन लेने की हैसियत रखता है।