Friday, March 22, 2019
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Daily Archives: 8th March 2019

प्रधानमंत्री ने कानपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास

कानपुरः जन सामना ब्यूरो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कानपुर का दौरा किया, इस मौके पर उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत जय गंगा मैया के उद्घोष के साथ की। इसके बाद उन्होंने पनकी थर्मल पावर संयंत्र की आधारशिला रखी तथा निराला नगर रेलवे ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के उपलक्ष्य में एक पट्टिका अनावरण किया। यहां से प्रधानमंत्री ने लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना तथा आगरा मेट्रो रेल परियोजना का भी उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री ने जनसभा में उमढ़े जन सैलाब को संबोधित करते हुए कहा कि कानपुर ऐसे बहादुर नेताओं की जन्मस्थली है जिन्होंने देश के लिए बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज शुरू की गई परियोजनाएं कानपुर तथा उत्तर प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएंगी।
श्री मोदी ने कहा कि कानपुर में बिजली की आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए राज्य और केन्द्र सरकार ने भरपूर प्रयास किया है। उन्होंने इस संदर्भ में पनकी थर्मल पावर संयंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह यह संयंत्र कानपुर तथा उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 76 लाख से अधिक मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने गंगा नदी की सफाई के लिए केन्द्र की ओर से की गई पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले यह समझा जाता था कि गंगा नदी को साफ करना एक असंभव कार्य है लेकिन अब उनकी सरकार इस असंभव कार्य को संभव बना रही है। श्री मोदी ने कहा कि नदी की सफाई के लिए नालों से निकलने वाले प्रदूषित जल के शोधन और नदी में गिरने वाले नालों को बंद करने के कई उपाय किए गए हैं।
श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बनने जा रहे रक्षा गलियारे से कानपुर के लोगों को बहुत फायदा होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कों, हवाई मार्गों और रेल मार्गों के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। इसके साथ ही कई मेट्रो परियोजनाएं भी शुरू की गई है। ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव लाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उप्र में अपराधियों का सफाया किया जा रहा है।

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महिला किसान… महिला सम्मान की हकदार..?

यूं तो महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है और बड़े बड़े आयोजन भी होते हैं उस दिन, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं लोग मूल मुद्दे से भटक जाते हैं। महिला दिवस मेरी समझ से मानवीय मूल्यों, स्त्री हकों और उनके उत्थान के लिए प्रयासरत और जो आवाज उठाती हैं, जागरूकता पैदा करती हैं वो ही महिला दिवस को सार्थक करते हैं। आज एक पिछड़े तबके की ओर ध्यान ले जाना चाहूंगी जो समाज में कार्य की दृष्टि से पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहीं हैं और कहीं ज्यादा मेहनती भी हैं लेकिन उनका दर्जा दोयम से भी नीचे है। मैं बात कर रही हूं महिला किसानों की।

महिला किसान दिवस 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। महिला किसान दिवस जिसका उद्देश्य महिलाओं में खेती किसानी में भागीदारी को बढ़ावा देना है। मेरी नजर में महिला दिवस के दिन महिला किसान की बात ना करके उनके साथ अन्याय करना होगा। महिला किसान जो बीजारोपण,रोपाई, उर्वरक वीटा, फसल कटाई और भंडारण वगैरह में पुरुषों के साथ बराबरी में काम करती है और एक बात स्पष्ट कर देना चाहूंगी कि किसान महिला खेतों में काम करने के बाद घर भी संभालती है और वहीं पुरुष अपना समय मनोरंजन में व्यतीत करता है। पुरुषों के मुकाबले में महिला किसान ज्यादा काम करती है तो उसे भेदभाव का सामना क्यों करना पड़ता है? क्यों उन्हें किसान का दर्जा नहीं मिल पाता है? किसान की पत्नी के रूप में ही क्यों पहचानी जाती हैं? सबसे बड़ा भेदभाव उनकी मजदूरी को लेकर होता है। पुरुषों के मुकाबले में उन्हें कम मजदूरी मिलती है। ज्यादातर किसान महिलाओं को नियम कानून की जानकारी नहीं होती है। पति की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी पत्नी पर आ जाती है लेकिन नियम कानून की जानकारी ना होने की वजह से वह अपनी जमीन पर मजदूरों की तरह काम करती है क्योंकि परिवार के पुरूष ( देवर, जेठ, भाई) महिला की जानकारी के अभाव के कारण उनका बेजा फायदा उठाते हैं। कई किसान महिलाएं कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचने के लिए अपनी लड़ाई नहीं लड़ती हैं। सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बावजूद इनकी  स्थिति में कोई सुधार नहीं आ रहा है।

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खादी वस्त्रों की फुटकर बिक्री पर 05 प्रतिशत की विशेष छूट 31 मार्च, 2019 तक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयन्ती वर्ष के अवसर पर खादी वस्त्रों की फुटकर बिक्री पर 05 प्रतिशत की विशेष छूट 31 मार्च, 2019 तक बढ़ाये जाने का निर्णय लिया गया है। खादी वस्त्रों की फुटकर बिक्री पर 5 प्रतिशत की विशेष छूट चालू वित्तीय वर्ष-2018-19 में दिनांक 10 अक्टूबर, 2018 से 31 मार्च, 2019 तक के लिये देये होगी और प्रदेश के बाहर के उत्पादन पर देय नहीं होगी। निर्गत शासनादेश के अनुसार विशेष छूट की सुविधा केवल ऐसी संस्थाओंध्समितियों को अनुमन्य होगी जिनके पास खादी / पाॅली खादी का वैध प्रमाण-पत्र हो तथा रजिस्ट्रेशन वैध हो। यह विशेष छूट केवल उन्हीं संस्थाओं को अनुमन्य होगी, जो खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, मुम्बई भारत सरकार अथवा उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा ए, बी, सी श्रेणी में वर्गीकृत हो। शासकीय विभागों, संगठनों, संस्थाओं, उपक्रमों, सहकारी समितियों व अन्य स्वायत्तशासी निकायों, जिनका प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रध् राज्य सरकार के अधीन दी जाने वाली बिक्री पर विशेष छूट अनुमन्य होगी।

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महिला दिवस क्या एक फैशन..?

मैं वोमे्न्स डे वाले दिन कुछ नहीं कहती एक चिढ़ सी होती है, इसलिए नहीं कि लड़कियां अभी भी पीछे हैं। सामाजिक रूप से गौर किया जाए तो कई पहलू दिखाई देते हैं कहीं आर्थिक स्थिति, कहीं अशिक्षा, कहीं धर्मांधता या परिवेश ऐसा होता है कि लड़कियां आगे बढ़ नहीं पाती हैं। लेकिन मुझे क्रोध इसलिए आता है महिला सम्मान या महिला दिवस सिर्फ मीटिंग, इटिंग और फंक्शन मात्र तक सिमट रहे हैं और जमीनी हकीकत से दूर हो रहें हैं। मैं ऐसा नहीं कह रही कि लड़कियों का विकास नहीं हो रहा है या वह नए कीर्तिमान नहीं स्थापित कर रही हैं, लेकिन अभी भी कहीं न कहीं स्त्रियां दुखी और पीड़ित हैं। उनकी भावनाओं की कद्र नहीं होती है और उन्हें दोयम दर्जा मिलता है। अखरने वाली बात यह भी लगती है कि महिला का सम्मान किसी एक दिन का मोहताज क्यों? जब वो सम्माननीय है तो उसे सहयोग कर उसका सम्मान बढ़ाइये।

महिला दिवस क्यों मनाया जाता है इसकी जानकारी भी सही तरीके से लोगों नहीं होती है। लेकिन प्रचार-प्रसार करने में लोग आगे रहते हैं। एक नजर इस बात पर कि महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? 8 मार्च को पूरी दुनिया में महिला दिवस मनाया जाता और करीब 29 देशों में इस दिन सार्वजनिक छुट्टी होती है। साधारणतया इस दिन लोग महिला के त्याग, समर्पण या किसी उपलब्धि की सराहना करते हैं। स्त्री को कोई उपहार देकर महिला दिवस की खुशी जाहिर करते हैं। सही है, लेकिन ये सिर्फ एक मनोरंजन का साधन भर होता है। स्त्रियों को पूजना या उपहार देना महिला दिवस नहीं है बल्कि सही मायनों में उनका आत्मबल बढ़ाना और और जमाने के साथ कदमताल मे सहयोग करना, उनके लिए सम्मान से कम नहीं है।

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