जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वर्तमान में कोविड 19 या कोरोना के संकट के इंसानी जीवन के हर पक्ष को प्रभावित किया है। मानवीय जीवन के कुछ हिस्से ज्यादा और कुछ कम प्रभावित हो सकते हैं लेकिन हर किसी पक्ष पर इसका कुछ न कुछ असर तो हो ही रहा है। शिक्षा जगत भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां इसका व्यापक असर देखा जा सकता है। ग़ौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान लगभग सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया और आदेश दिया गया कि ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बाकी बचे कोर्स को पूरा कराया जाये। जिसकों लेकर सरकारों ने सभी के लिए ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था करने की कमान संभाली l महामारी से पहले परम्परागत स्कूली शिक्षा पर पूर्ण रूप से ध्यान केन्द्रित था, अब महामारी के कारण स्कूली शिक्षा बाधित हुई है, 2022 में शिक्षा का रुख ऑनलाइन शिक्षा एवं ई-लेर्निंग्स की ओर रुझान बढ़ रहा हैl बहुत से पढ़ाई जो क्लास रूम में बैठकर पूरी की जाती थी अब घर बैठे बहुत से कोर्स पूरे किये जा रहे है l दुरस्त शिक्षा के माध्यम से अब ऐसे बच्चों तक भी पहुँच बनाई जा रही है जी कभी शिक्षा की मुख्य धारा से पीछे हो गए थे l पूर्व- प्राथमिक व प्राथमिक शिक्षा के लिए कुछ अलग से सोचने की आवश्यकता है जिससे शुरुआती शिक्षा को बच्चों में प्रेषित की जाएl बच्चों की शुरूआती दक्षताओं को पूर्ण करने के लिए समय के साथ लक्ष्य तय करने एवं मासिक प्राथमिक कौशल की उपलब्धि पाने पर ध्यान केन्द्रित करना होगाl प्रत्येक कक्षा में बच्चों को कक्षा अनुसार दक्षता की प्राथमिकता अनुसार जाँच कर उनकी सीखने में आई रूकावट एवं कमियों को दूर किया जाना चाहिएl सर्वप्रथम उनके लर्निंग लोस को पूरा किया जाकर नया पाठ्यक्रम आगे बढ़ाया जाये l शुरूआती कक्षाओं के लिए इसे कड़ाई से पूरा किया जाना आवश्यक हैl बच्चों की पढ़ाई के लिए माता-पिता, शिक्षकों एवं समुदाय की सहभागिता अति आवश्यक है, बच्चों के शिक्षण की गंभीरता को देखते हुए उनके कौशल बढ़ाने हेतु जिम्मेदारीपूर्ण कार्य करेlआज के समय में परम्परागत पढ़ाई का दौर बहुत बाधित हुआ हैl बच्चों की सीखने तरीकों में समयानुसार बदलाब करने की आवश्यकता हैl बच्चों को आधुनिकता से जुडी पठन-पाठन सामग्री से जोड़कर प्रायोगिक ज्ञान देने की आवश्यकता है, परंपरागत स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम पूरा कर पढ़ाई में बच्चों की दक्षता की ओर संकेत करती है परन्तु पाठ्यक्रम पूरा कर देने मात्र से बच्चों को पूर्ण दक्षता मिल जाएगी ये शायद हमारी भूल होगी, परम्परागत स्कूली पढ़ाई से थोड़ा हटकर बच्चों की पढ़ाई समझ के साथ पढ़ाई की प्राथमिकतायें तय किया जाये, एवं इसका जिम्मेदारी से पूरा करने का दायित्व सरकारें, शिक्षक एवं अभिभावक निभाए lलॉकडाउन के समय में बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से पूर्ण करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर थी जिन्हें यथासंभव पूर्ण करने की कोशिश कीl ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों और शिक्षको की परस्पर पढ़ाई का गेप को कम करने के लिए कार्य किया गया l परन्तु हम ये दाबे से नहीं कह सकते की यह साधन बच्चों के लिए पूर्ण कारगर रहा होगाl शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट असर 2021 के अनुसार नामांकित सभी बच्चों में से दो तिहाई से अधिक बच्चों के पास घर पर स्मार्टफ़ोन 67l6% हैं, इनमें से लगभग एक चौथाई 26.1% ऐसे बच्चे हैं जिनके लिए यह स्मार्टफ़ोन उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। इसमें कक्षावार देखने पर यह स्पष्ट होता है कि छोटी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की अपेक्षा उच्च कक्षा में पढ़ने वाले ज़्यादा|
श्याम कोलारा (लेखक)
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Jansaamna
हम में से कितने लोग सोशल मीडिया से कुछ अच्छी बातें सीखते है? या सोशल मीडिया का उपयोग नीतिमत्ता से करते है, शायद बहुत कम। ज़्यादातर ये मंच झूठी तारीफ़, झगड़े, दुष्प्रचार और किसी को नीचा दिखाने के लिए ही उपयोग होता है।
वैश्विक रूप से ब्रिटेन, अमेरिका सहित अनेक देशों में ओमीक्रान वेरिएंट का कहर और भारत में बढ़ते केसों को ध्यान में रखते हुए आगामी पांच राज्यों में कुछ महीनों में होने वाले विधान सभाओं का चुनाव और वर्तमान यूपी में हो रही रथ यात्राओं, रैलियों जनसभाओं में बिना उपयुक्त कोविड व्यवहार पालन के उपस्थित नागरिकों को देखते हुए बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों, जानकारों, टीवी चैनलों पर डिबेट और गली मोहल्लों में इस चर्चा को बल मिल रहा है कि क्या चुनावी सभाओं को डिजिटल मीडिया तक सीमित करने संबंधी किसी विकल्प पर विचार किया जाना उचित रहेगा ?
एक वीडियो देखा था, एक ताकतवर मुर्गा एक कौए पर चढ़ बैठा था और उसको अपनी चोंच से जोर जोर से वार कर उसे घायल कर दिया था और कौवों का झुंड उसके ऊपर और आसपास उड़ कर कांव कांव कर रहे थे। कोई भी कौवा उसे बचाने के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठा रहे थे। सिर्फ उड़ा उड़ करके शोर मचाते हुए उस कौए को मरते हुए देख रहे थे। अगर सभी कौवे एक साथ उस अकेले हमलावर पर घात करते तो शायद उस कौवे को बचा पाते। अगर नहीं भी बचा पाते तो अपनी ताकत का संदेश तो उस हमलावर मुर्गे को दे ही सकते थे। कांव कांव करके उड़ने से सिर्फ शोर हो सकता हैं बचाव नहीं।
भारत बड़ी तेज़ी के साथ डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ते हुए डिजिटलाइजेशन की आंधी में, संकरी गलियों रूपी मानव हस्तकार्य याने हैंडवर्क को विशाल चौड़े रास्तों याने डिजिटलाइजेशन की ओर लाया जा सके ताकि सब काम तेजी से हो अर्थात एकसंकरी गली विशाल रोडरस्ते का स्थान लेकर हजारों लाखों काम एक साथ हो, यह है हमारे नए भारत का रणनीतिक रोड मैप का एक हिस्सा!!!
बहुजन समाज पार्टी का गठन 14 अप्रैल 1984 को मान्यवर कांशीराम के द्वारा किया गया था उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने शानदार और ऐतिहासिक चुनावी प्रदर्शन के कारण 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
अनिल ने अपना बिजली का बिल सही समय पर जमा करा दिया लेकिन फिर भी विभाग ने उसका बिजली कनैक्शन काट दिया। रोमा ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन भेजने की अंतिम तिथि से 4 दिन पहले ही स्पीड पोस्ट द्वारा आवेदन भेज दिया था लेकिन आवेदन सही समय पर नहीं पहुंचने के कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ सकी और डाक विभाग इसके लिए अपनी गलती मानने को तैयार नहीं। सीमा का लैंडलाइन फोन कई महीनों से खराब पड़ा है पर विभाग फोन ठीक कराने के बजाय बिल लगातार भेज रहा है और बिलों के भुगतान के लिए बाध्य करता है।
भारत हजारों वर्षों से पारंपरिक, शिक्षण, संस्कृति, परंपराओं, प्रथाओं, वेदों कतेबों, साहित्यिक खजाने का अभूतपूर्व भंडार रहा है। जिसके बल पर भारत माता को विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त था, परंतु अंग्रेजों की बुरी नज़र लगी और भारत जैसे सोने की चिड़िया के अणखुट खजाने और प्राकृतिक सौंदर्यता से छेड़छाड़ कर अंग्रेजों ने न सिर्फ भारतीय क्षमता, सौंदर्यता और खजाने को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचाया बल्कि इसके दो टुकड़े भी कर दिए।