ऊंचाहार/रायबरेली,पवन कुमार गुप्ता । भाजपा के लिए यादव मतदाताओं को साधने ऊंचाहार पहुंची मुलायम सिंह यादव की पुत्र वधू अपर्णा यादव ने रोहनिया ब्लाक में भ्रमण किया और गली कूंचों में पहुंचकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। ऊंचाहार विधान सभा क्षेत्र में अपर्णा यादव सबसे पहले रोहनिया ब्लाक के अप्टा गांव पहुंची। यहां 26 जून 2017 को दो पक्षों में हुए विवाद में पांच ब्राह्मण युवकों को जिंदा जलाकर मार डाला गया था। अपर्णा का यहां पर ग्राम प्रधान रामश्री यादव के घर पर कार्यक्रम था। जिनके बेटे अप्टा कांड में आरोपित है और जेल में निरुद्ध है। यहां पर ग्राम प्रधान ने उनका स्वागत किया और अपने संक्षिप्त संबोधन में उन्होंने योगी सरकार का बखान किया। जबकि अपर्णा यादव के सामने ही ग्राम प्रधान के रिश्तेदारों ने अप्टा कांड की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा शासनकाल के दौरान ही यह घटना हुई थी। जिसमें निर्दोष को फंसाया गया है। उसके बाद अपर्णा का काफिला अप्टा कांड के दूसरे आरोपित पूर्व प्रमुख शिव कुमार यादव का यहां पहुंचा। हाल ही शिव कुमार यादव के भाई व पूर्व प्रधान शिव करन यादव का निधन हुआ था। अपर्णा ने यहां पर शोक संतृप्त परिवार को संवेदना व्यक्त की । उसके बाद उन्होंने रोहनिया गांव की एक चौपाल में भी भाग लिया। चौपाल में अपर्णा यादव ने कहा कि प्रदेश से गुंडाराज का खात्मा योगी राज में हुआ है। आज प्रदेश का आम आदमी चैन से रह रहा है। प्रदेश सरकार ने हर समाज और हर वर्ग का उत्थान के लिए काम किया है। इसलिए भाजपा को एक बार फिर समर्थन देना चाहिए। इस मौके पर पूर्व प्रदेश महिला मोर्चा महामंत्री किरन सिंह, क्षेत्रीय मंत्री बृजेश सिंह, पूर्व विधायक गजाधर सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप यादव, विवेक विक्रम सिंह ,अंकुश यादव, एकता जायसवाल, अनीता श्रीवास्तव, वर्षा तिवारी समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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Jansaamna
पहले के ज़माने में शादीशुदा स्त्री के कुछ दायरे और बहू के औधे की गरिमा हुआ करती थी। किसी खानदान की इज्जत और शाख होती है बहूएं। ससुराल वाले कितने भी मार्डन क्यूँ न हो, अपने घर की लक्ष्मी को पूरी दुनिया के सामने गैर मर्द के साथ हर सीमाएं पार करते कामुक हरकतें करते हुए कैसे देख सकते है। भले ही उनके प्रोफ़ेशन का हिस्सा हो। आज के आधुनिक ज़माने में कुछ लोगों को ऐसी बातें दकियानुसी और पुराने खयालात वाली लग सकती है। पर क्या हम खुद अपने घर की बहू बेटियों को ऐसी हालत में देख सकते है। कई हीरोइनों ने शादी के बाद क्षेत्र सन्यास ले लिया है। कहने का मतलब ये नहीं की शादी के बाद काम छोड़ दो, पर आप किसी के घर की मर्यादा हो इज्जत हो इस बात को याद रखकर एक सीमा तय करते काम करना चाहिए।
आज हर वर्गों एक चिंताजनक दौर साफ़ नजर आ रहा है; अधिक उम्र तक युवक-युवतियों की शादी न होना। इसको लेकर आज सभी समाज काफी चिंताग्रस्त है। लड़के की उम्र 30 के पार जाने लगी है परन्तु शादी की बात करे तो इस उम्र तक उनकी शादी न होना एक सामाजिक समस्या बनकर उभर रही है। यह समस्या इतनी विकराल होती जा रही है कि लड़के एवं लड़कियों की उम्र 30-35 पार करने पर भी वे कुँवारे बैठे है; यही कारण है कि लड़के-लड़कियों में एक अवसाद की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है। इसका एक मुख्य कारणों में तेजी से समाज में परम्पराओं का बदलता दौर शामिल है।
ऊंचाहार/ रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता।
Lucknow:
स्कूल में हिजाब पहनकर आने की ज़िद्द सरासर गलत है, मुद्दा इतना बड़ा नहीं जितना खिंचा जा रहा है। आप कुछ भी पहनने के लिए आज़ाद हो। बुर्का, हिजाब, सलवार-कमीज, या फटी हुई जीन्स कहीं पर कुछ भी पहनिए किसीने कभी नहीं रोका, पर स्कूल का एक अनुशासन होता है, स्कूली बच्चो के लिए यूनिफॉर्म बहुत जरूरी है। सभी की यूनिफॉर्म एक जैसे होती है तो बच्चो के अंदर हीन भावना जन्म नहीं लेती। सभी बच्चे जब यूनिफॉर्म में होते है तो यह पता नहीं चलता है की कौन अमीर का बेटा है कौन गरीब का। कौन हिन्दु, कौन मुसलमान सब एक समान लगते है।
माँ शारदे की वृहद पुत्री स्वर कोकिला लता जी के जीवन का विश्लेषण हमें जीवन के बहुत सारे पक्षों पर सोचने और सीखने को प्रेरित करता है। वह लता जी जो सबके दिलों में चीर-स्थायी विराजमान रहेंगी। आइये हम उनके जीवन के कुछ पक्षों को उजागर कर उनसे सीखने का प्रयास करते है।