पूर्व में हुई चोरी की घटनाएं फाइलों में बंद,नए अपराध ले रहें जन्म
रायबरेली,पवन कुमार गुप्ता । मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक की हत्या करके शव को सड़क के किनारे फेंक दिया गया है।मृतक की मां ने कोतवाली ऊंचाहार में तहरीर देकर पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। सोमवार की रात ऊंचाहार क्षेत्र के चड़रई चौराहा से बकिया का पुरवा गांव को जाने वाले लिंक मार्ग के किनारे यह घटना घटित हुई है।मंगलवार की सुबह राहगीरों ने सड़क के किनारे पड़े एक शव को देखा तो हैरान रह गए।सड़क के किनारे पड़े शव की बात आसपास के क्षेत्र में फैलते ही घटना स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।घटना की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची तो मृतक की पहचान दीपक सिंह उर्फ माना (30 वर्ष) पुत्र स्व राम आधार सिंह निवासी गांव नेवादा के रूप में हुई।
Jansaamna
पर्यावरण के लिए प्लास्टिक पूरी दुनिया में बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इसीलिए इसका उपयोग सीमित करने और कई प्रकार के प्लास्टिक पर प्रतिबंध की मांग उठती रही है। भारत में भी ऐसी ही मांग निरन्तर होती रही हैं और समय-समय पर इसके लिए अदालतों द्वारा सख्त निर्देश भी जारी किए जाते रहे हैं किन्तु इन निर्देशों की पालना कराने में सख्ती का अभाव सदैव स्पष्ट परिलक्षित होता रहा है। यही कारण है कि लाख प्रयासों के बावजूद प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में सफलता नहीं मिल पा रही है।
गौरी बालकनी में बैठे-बैठे अपने अतीत की यादों में खोई हुई थी। कैसे बाल्यकाल से ही सबसे बड़ी होने का दायित्व निभाया। कभी छोटी बहन अस्वस्थ हूई, असमय पिता एक्सीडेंट का शिकार हुए, उसके बाद माँ की ज़िम्मेदारी और भाई की मानसिक स्थिति। इन सबके बीच गौरी केवल और केवल परिस्थितियों से जूझती रहीं। गौरी की बाल्यावस्था तो मात्र संघर्ष की अनवरत यात्रा थी। बाल्यकाल में तो उसे कभी सुख की परिभाषा समझ ही नहीं आई। कुछ समय पश्चात शुरुआत हुई किशोरावस्था की। गौरी को चन्द्रशेखर का साथ मिला। पर यह क्या था चन्द्रशेखर की नजर में तो गौरी की कोई कीमत ही नहीं थी। वह तो सिर्फ उसके लिए खाना बनाने वाली थी। ससुराल वालों की जिद के चलते लड़का होने की लालसा में उसने चार-चार पुत्रियों को जन्म दिया। प्रसव पीड़ा से लेकर बच्चियों के लालन-पालन में परिवार का न मानसिक और न शारीरिक सहयोग मिला। पर गौरी ने अपनी पुत्रियों की शिक्षा-दीक्षा में स्वस्तर पर भी भरसक प्रयत्न किए।
चंदौली।
भारत में असंगठित क्षेत्र विशाल स्तर पर है। साथियों हम आगे चर्चा करें इसके पहले हमें संगठित और असंगठित श्रमिकों के बारे में समझना होगा। संगठित क्षेत्र वह है जो उचित प्राधिकारी या सरकार के साथ शामिल हो और उसके नियमों और विनियमों का पालन करे। इसके विपरीत, असंगठित क्षेत्र को सेक्टर के रूप में समझा जा सकता है, जो सरकार के साथ शामिल नहीं है और इस प्रकार, किसी भी नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।…
सलोन/रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता।
फिरोजाबाद।
फिरोजाबाद।