ट्रांसपोर्टरों के दस्तावेजों की अवधि 31 दिसम्बर तक बढ़ायी
हाथरस। ट्रांसपोर्टरों द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ट्रांसपोर्टरों के लिए गाडि़यों के टैक्स, फिटनेस व परमिट के लिए दी गई छूट में समय अवधि बढ़ाने हेतु भेजे गए पत्र के बाद केंद्रीय मंत्री द्वारा ट्रांसपोर्टरों की मांग पर उक्त अवधि को 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है।
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Jansaamna
रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता।
चंदौली।
रायबरेली,पवन कुमार गुप्ता।
रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता।
श्रीराम का जीवन चरित्र भारतीय संस्कृति की सम्पूर्णता का द्योतक है| उनका राज्य सञ्चालन आदर्श शासन का सर्वोत्तम उदाहरण है| आजादी के बाद महात्मा गाँधी ने भारत में रामराज्य के ही आदर्शों से ओतप्रोत शासन की परिकल्पना की थी| जो कदाचित राजनीति के विभिन्न विद्रूपों के कारण आज तक साकार नहीं हो पायी| 15 अगस्त 1947 के बाद से हमारे नीति-नियन्ता रामराज्य लाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें तो करते रहे परन्तु नयी पीढ़ी को राम के आदर्शों से जोड़ने का सार्थक प्रयास शायद ही कभी हुआ हो| एक समय तो ऐसा भी आया जब राम को हिन्दुत्व की सीमा रेखा में समेटकर उनके चरित्र की शिक्षा को साम्प्रदायिक तक कहा गया|
पतारा, डॉ. दीपकुमार शुक्ल।
वर्ष 1964 में प्रधानमंत्री बनने से पहले लाल बहादुर शास्त्री विदेश मंत्री, गृहमंत्री और रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाल चुके थे। ईमानदार छवि और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्त्री नैतिकता की मिसाल थे। जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने, तब उन्हें सरकारी आवास के साथ इंपाला शेवरले कार भी मिली थी लेकिन उसका उपयोग वे बेहद कम किया करते थे। किसी राजकीय अतिथि के आने पर ही वह गाड़ी निकाली जाती थी। एक बार शास्त्री जी के बेटे सुनील शास्त्री किसी निजी कार्य के लिए यही सरकारी कार उनसे बगैर पूछे ले गए और अपना काम पूरा करने के पश्चात् कार चुपचाप लाकर खड़ी कर दी। जब शास्त्री जी को इस बात का पता चला तो उन्होंने ड्राइवर को बुलाकर पूछा कि गाड़ी कितने किलोमीटर चली?
सत्य और अहिंसा के पुजारी, एक सच्चे राष्ट्र प्रेमी और देश को ब्रिटिश सरकार के हाथों से आज़ाद करवाने वाले साबरमती के संत की और राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की जन्म जयंती 2 अक्टूबर को न सिर्फ पूरा हिन्दुस्तान, बल्कि दुनिया के कई देश गांधी जयंती मनाते है। महात्मा गाँधी को लोग बापू के नाम से भी पुकारते थे। बापू ने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ादी दिलाई। उन्होंने लोगों को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाते हुए अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाई। उनके अहिंसा के सिद्धांत को पूरी दुनिया ने सलाम किया। यही वजह है कि पूरा विश्व 2 अक्तूबर के दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के तौर पर भी मनाता है। महात्मा गांधी के विचारों ने ना सिर्फ़ भारत के लोगों का मार्ग दर्शन किया बल्कि विश्व का मार्गदर्शन किया। ऐसे महान राष्ट्रपिता गांधीजी ने अपने जीवन में कुछ आदर्शों को खास महत्व दिया।