अनुपस्थित अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने व 1 दिन का वेतन रोकने के निर्देश
चन्दौली। लगभग 4 महीने बाद उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया और इस दौरान कोविड.19 गाइड लाइन का पालन सुनिश्चित किया गया। रोस्टर के अनुसार जिलाधिकारी संजीव सिंह व पुलिस अधीक्षक अमित कुमार की अध्यक्षता में सकलडीहा तहसील सभागार में सम्पूर्ण समाधान दिवस मनाया गया। सम्पूर्ण समाधान दिवस में कुल 80 प्रार्थना पत्र पड़े। जिसमें मौके पर 08 का निस्तारण किया गया।नहरों में छलका लगाकर पानी रोके जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता सिचाई को निर्देश देते हुए कहा कि बेलदारों को प्रतिदिन हेड से टेल तक भ्रमण करने के निर्देश दिये। कहा छलता लगाकर रोकने वालो पर करें कड़ी कार्यवाही। ग्राम पंचायत ओरवा ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण किये जाने की शिकायत पर तहसीलदार को तत्काल कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिये। पट्टा होने के बावजूद भी दबंगों ने दबंगई द्वारा अतिक्रमण किया है उनके खिलाफ अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए कब्जा मुक्त कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने संयुक्त टीम को निर्देशित करते हुए कहा कि कब्जा मुक्त कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाय।
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Jansaamna
इटावा।
कानपुर।
1975 में लगाया गया आपातकाल आज भी लोग याद करते हैं और याद करने के साथ-साथ उस वक्त की दबंगई को भी याद करते हैं। आज भी बढ़ती हुई जनसंख्या चिंता का विषय है और इसे रोकने के लिए कारगर उपाय किए जाने चाहिए। अब तक जो भी नियम कानून इस मुद्दे को लेकर बने हैं वह ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए हैं। आज देश में हर मिनट पर 42 बच्चों का जन्म हो रहा है हर दिन 61,000 बच्चों का जन्म होता है। ये बढ़ती हुई आबादी रोजगार के अवसरों को खत्म कर रही है साथ ही गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है। इस बढ़ती हुई जनसंख्या की सबसे बड़ी समस्या स्थान की है, साथ ही बिजली और पानी की भी है। लगातार कट रहे जंगल प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और उसका खामियाजा भी हम भुगत रहें हैं। गरीबी और खाद्यान्न की समस्या का कारण जनसंख्या वृद्धि ही है और इसका दुष्प्रभाव चिकित्सा की बद इंतजामी के रूप में भी दिखाई देता है।
आज हमारी मानसिकता ये है कि जब तक हमें दो वक्त की रोटी और जीवन जरूरत की चीजें उपलब्ध हो जाती है तो समाज में ओरों की ज़िंदगी कैसे कट रही है उससे हमें क्या सरोकार। आज कोरोना और लाॅक डाउन की वजह से कई लोगों के सर से साया छीन गया, कई लोगों की नौकरी चली गई, कई बच्चों की पढ़ाई छूट गई कितनी संघर्षरत ज़िंदगी जी रहे है लोग। आज मुझे ऐसी ही एक परेशान लड़की का ईमेल आया जो सबके साथ साझा कर रही हूँ, और साथ ही सरकार से अपील है की और किसी भी मुद्दे से ज़्यादा जरूरी है इस वक्त लोगों को गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से उपर उठाया जाए। मुझे नहीं पता इसमें कितनी सच्चाई है पर अगर सच है तो सरकार का फ़र्ज़ है कि ऐसे लोगों की परेशानी सुनकर उचित न्याय दिया जाए।
इटावा।
शिक्षा किसी भी राष्ट्र अथवा समाज के समुचित विकास एवं निरंतर उत्थान का मुख्य कारक माना गया है किंतु पिछले डेढ़ सालों से कोविड-19 महमारी के दुष्परिणाम से यदि सबसे अधिक कोई प्रणाली अथवा व्यवस्था का ह्रास हुआ है तो वह है शिक्षा प्रणाली। वर्तमान समय में शिक्षा को विद्यालय जाकर प्राप्त करने की व्यवस्था का स्थान ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने ले लिया है जो कि घर बैठे ही बच्चों को फोन लैपटॉप कंप्यूटर इत्यादि से प्राप्त करना है जिसके लाभ तो बहुत कम है किंतु दुष्परिणाम बहुत सारे देखे जा रहे हैं। इस महामारी के संकट पूर्ण समय में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली मात्र एक अल्पकालिक विकल्प के रूप में तो सही है किंतु इसे प्राय: के लिए अनिवार्य बनता यदि देखा जाए तो यह एक चिंता का विषय है।
कानपुर।