लखनऊ, जन सामना ब्यूरो। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी तथा कानपुर निवासी जय वाजपेयी के एक वायरल हो रहे फोटो के आधार पर एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने इस मामले की जाँच करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गये अपने पत्र में नूतन ने कहा है कि जय वाजपेयी विकास दूबे का बहुत नजदीकी एवं मुख्य खजांची बताया जा रहा है, जिसके द्वारा घटना के बाद विकास दूबे के परिवार को भगाया गया। वह एसटीएफ की कस्टडी में है जहाँ उससे इन बिन्दुओं पर पूछताछ जारी है। नूतन के अनुसार इसी बीच अवनीश अवस्थी तथा जय वाजपेयी की निकटता वाली एक तस्वीर सामने आई है, जो श्री अवस्थी के हाल की एक पारिवारिक समारोह की बताई जा रही है, जिसमे जय वाजपेयी भी आमंत्रित बताया जा रहा है।
नूतन ने इस तस्वीर की सत्यता की जाँच करवाए जाने और तस्वीर के फर्जी नहीं होने पर श्री अवस्थी को न्यायहित में गृह विभाग से अलग करते हुए जय वाजपेयी जैसे अत्यंत संदिग्ध व्यक्ति से उनकी निकटता की पूछताछ किये जाने का अनुरोध किया है।
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Jansaamna
आज के इस आपातकाल दौर में जब आम जनता खुद के पेट की तपिश को ही मिटाने में अक्षम है, तो देश तो दूर की बात है साहेब, उससे उसी की आत्मनिर्भरता के बारें में बात करना बेमानी होगी। जहाँ आम जनता एक तरफ भौतिक तत्वों की मारी है तो दूसरी तरफ अभौतिक तत्व उसे तिल-तिल कर मरने को मजबूर कर रहे हैं , ऐसे में वह निर्भर बने भी तो कैसे ? कुदरत की माया देखें कहावत है कि आग लगते ही हवा का तीव्र हो जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया ही है। जहाँ एक तरफ सब पर भारी कोरोना महामारी ने आम जनता की तीन मुख्य जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान को प्रतिबंधित करने में कामयाब रही, तो वहीं दूसरी तरफ प्रकृति ने ओलों, तूफानों, चक्रवातों व भूकम्पों के द्वारा आम जनता को खूब सताया। इन बेकाबू हो चली आग की लपटों में तेल की आहुति ने आम जनता के वर्तमान को भी निगल लिया ऐसे में भविष्य का निर्माण भला यह करे भी तो कैसे ? पेट्रोल व डीजल तेल की कीमतों में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि ने भी आगे आकर आम जनता की मूल वृद्धि में भी आखिरी कील ठोक दी । देश में पिछले एक माह से पेट्रोल और डीजल के दाम जिस रफ्तार से अग्रसर हैं कि आम जनता के उपयोग से मीलों दूर निकल चुकी है। इस तीव्र वृद्धि ने अब तक के सारे रिकार्डों को बौना साबित करते हुए आपातकाल की इस धधकती ज्वाला में तेल की आहुति देने का काम किया है।
कोरोनावायरस महामारी का महिलाओं के काम पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। खासकर अकेली महिलाओं, विधवाओं, दैनिक मजदूरी करने या असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा कानूनों के तहत कोई सुरक्षा नहीं मिली है। उनके सामने कामकाज के दोहरे बोझ के साथ ही वित्तीय संकट भी आ खड़ा हुआ है। सबसे दुखदायी बात ये कि उन्हें दूर-दूर तक आशा की कोई किरण भी नज़र नहीं आ रही।
कासगंज, अनिल राठौर।
कानपुर देहात, जन सामना ब्यूरो।
लखनऊ, जन सामना ब्यूरो।
कानपुर नगर, अर्पण कश्यप।