जैसा कि पूर्वानुमान था, नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने हैट्रिक लगाते हुए 9 जून को तीसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली। यद्यपि विपक्षी पार्टियों के गठबन्धन इण्डिया ने राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन को कड़ी टक्कर दी है। जिससे भाजपा का 400 पार का स्वप्न साकार नहीं हो सका। इसके कारणों पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गहन विचार करना पड़ेगा। क्योंकि पार्टी के चाणक्यों ने 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने हेतु जो रणनीति बनायी थी, वह कहीं न कहीं विफल साबित हुई। जिसके चलते भाजपा को बहुमत से बहुत कम 240 सीटें ही प्राप्त हुईं। परन्तु उसके नेतृत्व वाले गठबन्धन राजग ने 292 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। जनवरी 2023 से फरवरी 2024 के बीच विभिन्न एजेंसियों द्वारा कराये गये चुनावी सर्वेक्षणों में भी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैट्रिक लगाते हुए दिखाई दे रहे थे। जो एकदम सही साबित हुआ। लेकिन सीटों को लेकर सर्वेक्षणों का आकलन गलत सिद्ध हुआ। देश की 13 अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कराये गये सर्वेक्षणों के आधार पर भाजपा गठबन्धन को 44.30 प्रतिशत वोट के साथ 341 के आसपास सीटें मिलने की सम्भावना थी।
लेख/विचार
बंपर नौकरियों के सहारे 2027 में विपक्ष को ‘बेरोजगार’ करेंगे योगी
भारतीय जनता पार्टी 2024 जैसे चुनावी नतीजे 2027 विधानसभा चुनाव में नहीं देखना चाहती है। खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिये अभी से सरकार के पेंच कसना शुरू कर दिये हैं। संगठन स्तर पर भी काम चल रहा है। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के शुरुआती तीन-चार महीनों में सम्पन्न होना है। इस हिसाब से सरकार के पास तीन साल से भी कम का समय बचा है। लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी खराब छवि वाले विधायकों का टिकट काटने में भी परहेज नहीं करेगी। गौरतलब हो, हाल में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उम्मीद से काफी कम सीटें मिली थीं। चुनाव आयोग ने जो आकड़े जारी किये हैं उसके अनुसार यूपी में 80 लोकसभा सीटें जिसके अंतर्गत 403 विधान सभाएं आती हैं, वहां अबकी से बीजेपी 162 विधान सभा क्षेत्रों में समाजवादी और कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी से पिछड़ गई थी। इन 162 विधान सभा क्षेेत्र के विधायकों पर भी गाज गिर सकती है।
वहीं 2027 में विपक्ष एक बार फिर से बेरोजगारी को मुद्दा नहीं बना पाये इसके लिये योगी ने सभी खाली पड़े रिक्त पदों को भरने के लिये बम्पर नौकरियां निकाली हैं।
2024 का जनादेशः मायने अनेक
लोकसभा चुनाव का शोर थम गया है। अब नतीजों की समीक्षा का दौर है। सभी दलों के नेता अपनी-अपनी खामियां और खूबियों का आकलन कर रहे हैं। मगर आम आदमी के नज़रिये से देखा जाए तो यह चुनाव कई मायनों में निचले से निचले स्तर पर जाता दिखा। तमाम दलों के नेता उनके समर्थक बार-बार अपनी जुबान से जहर उगलते रहे। जाति, धर्म, राम मंदिर, आरक्षण, मुस्लिम आरक्षण, संविधान, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, ईवीएम, किसान से लेकर वो जिहाद, मंगलसूत्र, मुजरा, कानून व्यवस्था, बाहुबली, मिट्टी में मिल गये माफिया, मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सब छाये रहे। एनडीए सरकार की सभी योजनाओं में से प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज सबसे प्रभावी और दूरगामी प्रतीत हुआ। जाति या समुदाय से इतर दूरदराज के इलाकों में जितने भी लोगों से बात हुई, उनमें से अधिकांश ने माना कि उन्हें मुफ्त अनाज मिला है। जरूरतमंदों ने इसके लिए सरकार की खूब सराहना की। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का फायदा उठाने वाला एक बड़ा वर्ग बीजेपी की हौसला अफजाई करता रहा। गुलाम कश्मीर, पाकिस्तान और चीन की भी खूब बात हुई।
संघ के प्रति कम होता मोदी का समर्पण भाव
लोकसभा चुनाव में बीजेपी की उत्तर प्रदेश में जो फजीहत हुई है, उसका ठीकरा एक-दूसरे के सिर फोड़ने की राजनीति के चलते राज्य में बीजेपी नेताओं के बीच आपसी वैमस्यता और गुटबाजी बढ़ती जा रही है। गुटबाजी का आलम यह है कि यह किसी एक स्तर पर नहीं, नीचे से लेकर ऊपर तक तो दिखाई पड़ ही रही है, इसके अलावा इसकी तपिश से दिल्ली भी नहीं बच पाया है। बल्कि राजनीति के कई जानकार और पार्टी से जमीनी स्तर से जुड़े नेता और कार्यकर्ता भी इस बात से आहत हैं कि अबकी से टिकट वितरण में खूब मनमानी की गई, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। बात यहीं तक सीमित नहीं है सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी टिकट बंटवारे के तौर-तरीको से आहत दिखाई दे रहा है। बस फर्क यह है कि यह लोग सार्वजनिक रूप से ऐसा कुछ नहीं बोल रहे हैं जिससे विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिल जाये। लोकसभा चुनाव में 80 की 80 सीटें जीतने का दावा करने वाली बीजेपी आधी सीटें भी नहीं जीत पाई। भाजपा की करारी हार के पीछे भले ही कई कारण गिनाए जा रहे हों, पर संघ से दूरी भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
किसानों की राहों में कीलें गाड़ने वाले मोदी की राह में अब हर कदम पर काँटे!
शायद आपको याद होगा कि कृषि के सम्बन्ध में बनाये गये काले कानूनों व फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए बनाये गये कानूनों सहित अन्य कई मांगों को लेकर विरोध करने वाले देश के आन्दोलनकारी किसानों को रोकने के लिये नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली की सीमावर्ती सभी सड़कों पर खतरनाक कीलें, कंटीले तार, कई लेयर की पक्की बैरिकेडिंग लगवा दीं थी। इसके साथ ही कई सड़कों को खुदवा दिया गया था और कई सड़कों पर पक्की दीवारें तक खड़ी करवा दीं थीं। सुरक्षा बलों के जवानों की तैनाती भारी संख्या में की गई थी। समय-समय पर लाठी चार्ज किया गया था और बर्बरता की सारी हदें ‘मोदी’ ने पार करवा दीं थीं। उस समय ‘मोदी की मंशा’ थी कि किसी भी कीमत पर देश के आन्दोलनकारी किसान, दिल्ली में ना घुसने पावें।
उस समय ऐसे नजारे देखने को मिले थे, जैसे कोई दुश्मन देश, दिल्ली पर हमला करने वाला था और उसी हमले को रोकने की तैयारी की गई थी। उस समय 6 लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी। इसके अलावा किसानों को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से अस्थाई जेलों को भी तैयार करवा दिया था। कई क्षेत्रों को छावनी में तब्दील करवा दिया था।
इस तैयारी के चलते ‘मोदी’ उस समय सफल भी हुये और पंजाब, हरियाणा सहित देश के अनेक राज्यों के किसानों को महीनों तक कठिन समय में भी अनेक कठिनाइयों का दर्द झेलना पड़ा था।
400 पार नहीं..किसी तरह नैया पार..।
केंद्र में फिर से गठबंधन की सरकार
नई दिल्लीः राजीव रंजन नाग। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर भाजपा के इस भरोसे का केंद्र था कि 2024 का चुनाव में जीत सुनिश्चित करना राम के हाथों में है। भगवा पार्टी ने राम मंदिर को वोट बटोरने के साधन के रूप में सीमित कर दिया। नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और भाजपा ने राम मंदिर के लिए सीधे वोट मांगे, लेकिन न केवल अयोध्या बल्कि फैजाबाद में भी हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी के दलित उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने अनारक्षित सीट पर भाजपा के सबसे पुराने नाम लल्लू सिंह को 54,567 मतों से हरा दिया। यहां राम मंदिर कार्ड के विफल होने का गहरा प्रतीकात्मक अर्थ है।
वाराणसी में नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर (1,52,513 वोट) राहुल गांधी के रायबरेली (3,900,30 वोट) से आधा है। यह किशोरी लाल शर्मा द्वारा स्मृति ईरानी से कांग्रेस के लिए अमेठी वापस छीने जाने से भी कम है। शर्मा 1,67,196 मतों से जीते। इससे मोदी द्वारा नामांकन दाखिल करने के समय गंगा पर किए गए दिव्यता के दावे को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
‘‘बैसाखियों के सहारे चलेगी बादशाहत’’
किसी भी देश के ‘लोकतंत्र’ जिसका अर्थ है, वह शासन-प्रणाली जिसमें वहाँ की जनता द्वारा चुने प्रतिनिधियों के हाथ में ‘सत्ता’ होती है, इसी लिये उसे ‘जनतंत्र’ की भी संज्ञा दी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि लोकतंत्र में जनता ही सबकुछ है, लेकिन होता ठीक उलट है, क्योंकि जैसे ही ‘मतदाता’ अपने ‘मत’ का प्रयोग कर लेते हैं, वह (मतदाता) जनता में शुमार हो जाता है और हाँथ-पैर छू कर, मिमयाकर, गिड़गिड़ाकर आदि हथकंडे अपना कर मतदाताओं का मत अपने पक्ष में लाकर अपने सिर विजयश्री का ‘तमगा’ हासिल कर लेने वाला ‘व्यक्ति’ देखते ही देखते अपने आपको ‘खास’ बना लेता है। इस के बाद इन ‘खास’ व्यक्तियों की एक राय शुमारी के बाद चाहे राज्य हो या देश, उसकी बागडोर संभालने वाला ‘खास व्यक्ति’ दिखावे के लिये अपने आपको कथित सेवक तो कहता है लेकिन कटु सच्चाई यही है कि उस ‘खास व्यक्ति’ के अन्दर ‘बादशाहत’ ही छुपी होती है।
आज हम बात कर रहे हैं, देश की बादशाहत की। लोकताँत्रिक व्यवस्था के तहत लोकसभा सामान्य निवार्चन-2024 के सामने आये नतीजों ने देश के मतदाताओं ने देश की बादशाहत को बैसाखियों के सहारे चलाने का संदेश दिया है अर्थात अबकी बार किसी राजनैतिक दल के हाँथ में स्पष्ट रूप से ना देकर, ‘समूह’ के माध्यम से (एनडीए अथवा इण्डिया गठबन्धन के माध्यम) चलाने का आधार बनाया है।
गाय-भैंसों को भी लग सकती है लू, गर्मियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल
बढ़ते पारे ने दुधारू पशुओं पर बहुत दबाव डाला है और यह सबसे बुरा तब होगा जब सापेक्ष आर्द्रता 90% से अधिक हो जाएगी। मौजूदा परिस्थितियों में दूध का उत्पादन कम फीड इनटेक और अतिरिक्त हीट लोड के कारण भी कम हुआ है। हरे चारे की मात्रा बढ़ानी चाहिए और लंबे चारे को खिलाने से पहले काटना चाहिए। यदि चराई का अभ्यास किया जाता है, तो जानवरों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चराने से बचें। 20-30 मिनट के लिए बराबर मात्रा में पानी में भिगोने से पोषक तत्वों का उपयोग बढ़ जाएगा। गर्मियों के दौरान आहार खनिज और विटामिन पूरकता में वृद्धि की जानी चाहिए क्योंकि गर्मी के तनाव के प्रभाव में इसका उत्सर्जन बढ़ जाता है। गर्मी के तनाव की अवधि के दौरान आहार में सोडियम और पोटेशियम की आपूर्ति से दूध की उपज बढ़ जाती है। पशुओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उचित कृमिनाशक और टीकाकरण कार्यक्रम का पालन किया जाना चाहिए।
देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो चुका है, गर्मी का असर इंसान के साथ-साथ मवेशियों के ऊपर भी दिखने लगा है। इस मौसम में पशुओं को लू लगने का खतरा बना रहता है साथ ही अधिक तापमान का असर दूध देने वाली मवेशियों पर होता है और उनके दूध देने की क्षमता कम हो जाती है। जिसका नुक़सान किसानों को उठाना पड़ता है। ऐसे में पशुपालकों को इस समय पशुओं की उचित देखभाल करनी चाहिए। बढ़ते तापमान को देखते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा पशुओं को लू से बचाने के लिए एडवाइजरी भी जारी की जाने लगी है।
कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड पर उठते सवाल
कोरोना वैक्सीन बनाने वाली ब्रिटिश कम्पनी एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में लिखित रूप से यह स्वीकार किया है कि उसकी वैक्सीन के गम्भीर साइड इफेक्ट्स हैं। इसके बाद भारतीय कम्पनी सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा बनायी जाने वाली वैक्सीन कोवीशील्ड पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ने जिस फार्मूले पर कोवीशील्ड नामक वैक्सीन बनायी है, उसे एस्ट्राजेनेका तथा ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी द्वारा तैयार किया गया था। लोकसभा चुनाव के बीच लन्दन से अचानक आई इस खबर ने भारत की जनता के होश उड़ा दिये हैं। विपक्षी दल जहाँ इसे सरकार के खिलाफ चुनावी मुद्दा बनाने की पुरजोर कोशिश में हैं वही भाजपा और उसके सहयोगी दल इस विषय से पूरी तरह बचने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक निहितार्थ कुछ भी निकाले जा रहे हों लेकिन इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। वह भी तब जब वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स अत्यन्त गम्भीर हैं तथा इससे लोगों की मृत्यु भी हुई है। जानकारों के मुताबिक इस साइड इफेक्ट्स को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के साथ थ्रोम्बोसिस (टीटीएस) नाम से जाना जाता है। इससे शरीर के विभिन्न हिस्सों में खून के थक्के बन जाते हैं तथा प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। प्लेटलेट्स वह छोटी कोशिकाएं होती हैं जो रक्त को जमने नहीं देती। इनका कम हो जाना काफी खतरनाक होता है। अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार टीटीएस दो तरह के टियर में होते हैं।
मदर्स डे
“इसको कहा था कि ऑफिस से छुट्टी ले ले लेकिन मेरी सुनती कहां है?” रेवती गुस्से में बड़बड़ा रही थी। “छह बजे लड़के वाले आ जाएंगे इसे देखने और अभी तो इसका तैयार होना भी बाकी है और कम से कम एक नाश्ता तो अपने हाथ का बना कर रखें क्या सब बाजार का ही खिलाएंगे?” रेवती अपने पति शंकर की ओर देखते हुए बोली।
शंकर:- “कहा तो था मैंने कि जल्दी घर आ जाना, रुको! मैं फोन करता हूं उसे। आजकल ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा रहता है कहीं फस गई होगी।”
शंकर:- “हेलो! बेटा कहां हो? घर आने में कितनी देर है? तुम्हें पता है सब फिर भी लेट कर रही हो? चलो जल्दी घर आ जाओ।”
मुस्कान:- “जी पापा! बस निकल ही रही थी, आज काम भी जरा ज्यादा था बस आधे घंटे में आ रही हूं।”
शंकर:- “हां! ठीक है ।”
(शंकर रेवती से):- “आ रही है आधे घंटे में”
रेवती:- “भगवान करे सब ठीक से निपट जाए। आज छुट्टी ले लेती तो अच्छा होता। खैर।”
करीब पौने घंटे में मुस्कान घर आई।
मुस्कान:- “सॉरी – सॉरी जरा लेट हो गई। बस! अभी दस मिनट में रेडी हो जाती हूं।” रेवती के चेहरे पर नाराजगी के भाव थे।
मुस्कान:- “मम्मी ढोकले का गोल रेडी है ना अभी बना देती हूं।”
मुस्कान:- “अरे मम्मी! क्यों गुस्सा कर रही हो सब कुछ समय पर हो जाएगा। उन्हें आने में अभी एक घंटा बाकी है तब तक सब हो जाएगा।” रेवती बिना कुछ बोले किचन में चली जाती है। करीब आधे घंटे बाद मुस्कान पटियाला सलवार कमीज पहन कर बाहर आती है। कानों में झुमके, आंखों में काजल, गले में पतली चेन, हाथों में कड़े डालकर बहुत प्यारी लग रही थी। वो सादगी में भी बहुत अच्छी दिख रही थी।
रेवती:- “अरे! लिपस्टिक क्यों नहीं लगाई और वह पेंडेंट सेट रखा था वो पहनना था बेटा! इतना सिंपल कोई तैयार होता है क्या?”
Jansaamna