शहर में बिना नक्शे व मानक विहीन चल रहे हॉस्पिटलों और नर्सिंगहोमो पर कानपुर विकास प्रधिकरण कर पायेगा कोई कार्यवाही
मानक विहीन व बिना नक्शे के संचालित हो रहे हॉस्पिटलो और नर्सिंगहोमो पर कई बार दिए जा चुके है कार्यवाही के आदेश।
कई बार आदेश देने के बाद भी अभी तक नही हुई है किसी भी हॉस्पिटलो और नर्सिंगहोमो पर कोई कार्यवाही।
नियमानुसार आवासीय क्षेत्र में कम से कम 300 स्क्वायर फीट जगह होनी चाहिए एक हॉस्पिटल को संचालित करने के लिए इसके बावजूद कालोनियों में संचालित हो रहे है हॉस्पिटल
कानपुर।सारे नियम और रेगुलेशन को दर किनार कर शहर में हजारों की तदात में प्राइवेट नर्सिंगहोमो और हॉस्पिटलो का संचालन किया जा रहा है। कानपुर शहर में संचालित हो रहे नर्सिंगहोमो और हॉस्पिटलों का ना तो मानचित्र स्वीकृत है और ना ही पार्किंग की सुबिधा के साथ अन्य मूल भूत शुभिधाए है फिरभि कानपुर विकास प्राधिकरण शहर में चल रहे मानको के विपरीत बने नर्सिंगहोमो और हॉस्पिटलो पर कोई ठोस कार्यवाही नही कर पा रहा है।
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Jansaamna
कानपुर।
आज के युग में प्रत्येक देश, समाज एवं वर्ग विकसित होना चाहता है। जब पुरुष वर्ग की चाह है कि वह क्षेत्र में नये नये आयाम प्राप्त करे तो विकास की इस दौड़ में महिलाएं पीछे क्यों रहें? यह प्रश्न अर्थहीन कतई नहीं है। इसी नजरिये से देखा जाये तो लड़कियों के विवाह की उम्र का प्रश्न भी केवल संतुलित सामाजिक व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, सोंच, सुरक्षा, विकास से भी जुड़ा है। अतएव नारी वर्ग को अपने जीवन स्तर को ऊंचाई तक ही नहीं ले जाना है बल्कि उन्हें एक ऐसा उदाहरण पेश करना है जिसकी उपयोगिता सदैव बनी रहे। बदलते दौर में नारी वर्ग ने सुंदर कपड़े पहनना, सुन्दर व आकर्षक दिखना, सुंदर घर सजाना तक ही सीमित नहीं रखा है बल्कि ज्ञान-विज्ञान की उच्चकोटि की बातें करना भलीभांति सीख लिया है। लेकिन अब नारी वर्ग को अपने पैरों पर खड़े होकर स्वयं को निर्मित करते हुए समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी योगदान देना है। और इस उद्देश्य में एक बड़ी बाधा मानी जाती है कच्ची उम्र में विवाह के बंधन में बंध जाना। लेकिन अब इस बाधा से मुक्ति मिलने का एक नया अध्याय शुरू करते हुए एक अच्छी पहल की गई है और वहल है वैवाहिक बन्धन में बंधने हेतु 21 वर्ष की न्यूनतम उम्र का नियत किया जाना।
भारत तेज़ी से डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है। हर क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रतिस्थापित की जा रही है। करीब -करीब हर क्षेत्र के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को नई प्रौद्योगिकी के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में तब्दीली का क्रम तीव्र गति से शुरू है और सरकारी विभागों को पूर्ण डिजिटल करने का क्रम भी जोर-शोर से शुरू है!!! साथियों अगर हम शासकीय कार्यालयों की वर्तमान स्थिति की बात करें तो जितनी तेजी से डिजिटल इंडिया हो रहा है उतनी तेजी से सरकारी विभागों में कार्य नहीं हो रहा है!! जो एक कड़वा सच है!! बड़े बुजुर्गों का कहना है, आदत से बाज नहीं आओगे!! बिल्कुल सच!!! साथियों यही कहावत आज हम देख रहे हैं छोटे-छोटे कार्यो के लिए 50 चक्कर!! सब मिली भगत!!
22 दिसंबर को प्रतिवर्ष मनाते राष्ट्रीय गणित का दिन।