Saturday, September 12, 2026
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मनोरंजन

रेखा भारद्वाज के म्यूजिक वीडियो में अभिनय करेंगी अभिनेत्री नीतू चंद्रा

रेखाजी के साथ काम करना सपना सच होने जैसा है: नीतू चंद्रा
मुंबईः जन सामना ब्यूरो। राहत फतेह अली खान की सुपर सल्सेसफुल रोमांटिक म्यूजिक वीडियो बंजारे में अभिनय करने के बाद, अभिनेत्री नीतू चंद्रा जल्द ही गायक रेखा भारद्वाज के म्यूजिक वीडियो में नजर आएंगी। इस म्यूजिक वीडियो को संगीतकार अनुपमा राग द्वारा कंपोज किया जाएगा। नीतू इस म्यूजिक वीडियो के लिए लास एंजेल्स में शूटिंग करेंगी।
गायिका रेखा भारद्वाज के साथ काम करने के बारे में नीतू कहती हैं, रेखा जी हमेशा मेरी पसंदीदा गायकों में से एक रही हैं। उनके साथ काम करने का मेरा सपना रहा है। मैं इस अवसर को खोना नहीं चाहती थी। उन जैसी महान कलाकार के साथ काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उनकी शैली मेरी ऑल टाइम फेवरिट रही है।
यह पहली बार नहीं है कि दोनों एक साथ काम कर रहे हैं। नीतू और रेखा जी पहले भी थियेटर प्ले ‘उमराव जान’ के लिए मिल कर काम कर चुके हैं। इसमें नीतू ने उमराव जान का किरदार निभाया था और रेखा जी ने संगीत दिया था।

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प्रेमियों के अनकहे दर्द को बयाँ करता लक्की राज की आवाज में ‘तुम बिन लागे न जिया’: राज महाजन

दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर का लिखा यह है पहला गीत
प्रसिद्ध म्यूजिक लेबल मोक्ष म्यूजिक कंपनी ने रिलीज किया बहुप्रतीक्षित गाना “तुम बिन लागे न जिया”, जिसको अपनी रूहानियत भरी आवाज से मधुर बनाया गायक लक्की राज ने। जिस गहराई और दर्द से लक्की राज ने इसे गाया है। लक्की राज के गाये इस गाने को सुनकर वाकई में रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बेहतरीन धुन से बंधा यह गाना प्रेमियों की तड़प और विरह को जाहिर करता है।
इस बारे में लक्की राज ने बताया, ‘यह मेरा पहला गाना था तो जाहिर सी बात है कि मैं काफी नर्वस था। परन्तु, अब जब यह आप सब के सामने आ गया है, तो प्यार देखकर मैं काफी खुश हूँ। मैं राज महाजन सर का धन्यवाद करता हूँ, इतना सुन्दर गाना मुझे देने के लिए। जबसे इसे रिकाॅर्ड है तभी से हर जगह इसे ही गुनगुनाता रहता हूँ. तुम बिन लागे न जिया…करूँ कासे बतियाँ ओ पिया.’ मुझे चारों तरफ से शुभकामनायें मिल रही हैं।
आपको बता दें कि लक्की राज को गाॅडफादर के तौर पर राज महाजन प्रमोट कर रहे हैं है। कुछ समय पहले लक्की ने मोक्ष म्यूजिक कंपनी के साथ 4 साल का काॅन्ट्रैक्ट साइन किया है। लक्की राज के नाम में ‘राज’ शीर्षक राज महाजन ने अपने नाम से दिया है और इस प्रकार लक्की को राज महाजन ने अपना नाम भी दिया है।
इस गाने का सर्वश्रेष्ठ हिस्सा है इसके बोल, ‘तुम बिन लागे न जिया’ निकला है दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर समीर श्रीवास्तव की कलम से। वैसे तो समीर लाजपत नगर थाने में एडिशनल एसएचओ हैं और लिखना उनका शौक है। इस बारे में उन्होंने बताया, ‘वैसे काम के चलते समय कम ही मिलता है। लेकिन लिखना मुझे काफी अच्छा लगता है। राज साहब मेरे काफी अच्छे मित्र हैं। एक दिन हम यूहीं साथ बैठे थे। राज अपने स्टूडियो में एक धुन गुनगुना रहे थे, और उन्होंने मुझे धुन पर लिखने को कहा। बस वहीं से शुरुआत हुई इस गाने की। देखा जाए तो यह मेरा भी पहला गाना है। मैं भी नर्वस हूँ।”

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ब्रॉडवे ने किया ‘मुगल-ए-आजमः द म्यूजिकल’ को सम्मानित

⇒मुगल-ए-आजमः द म्यूजिकल’ सर्वश्रेष्ठ भारतीय नाटक घोषित
⇒अधिकांश ब्रॉडवे पुरस्कार डाला झोली में 14 ब्रॉडवे वर्ल्ड इंडिया अवार्ड्स में से 7 पुरस्कार जीते
मुंबईः जन सामना ब्यूरो। अभी तक का भारत का सबसे बड़ा और असाधारण नाटक- मुगल-ए-आजमः द म्यूजिकल ने न केवल दर्शकों का प्यार और प्रशंसा हासिल किया है, बल्कि इसने प्रतिष्ठित ब्रॉडवे वर्ल्ड इंडिया अवार्ड्स 2017 जैसा शीर्ष सम्मान भी हासिल कर लिया है।
‘मुगल-ए-आजमः द म्यूजिकल’ ने सात पुरस्कार हासिल किए, जिसमें सर्वश्रेष्ठ प्ले (शापोर जी पालोन जी व एन.सी.पी.ए), फिरोज अब्बास खान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, मयूरी उपाध्याय को सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल कोरियोग्राफी, मनीष मल्होत्रा को सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल कॉस्ट्यूम डिजाइन, बेस्ट एन्सेंबल कास्ट, बेस्ट ओरिजिनल लाइट डिजाइन के लिए डेविड लैंडर और नील पटेल को सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल सेट डिजाइन जैसे सात पुरस्कार शामिल है।
निर्देशक फिरोज अब्बास खान कहते हैं, ‘मैं इन पुरस्कारों से अभिभूत हूं. यह उन असाधारण कलाकारों और टीम का ही कमाल है, जिन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया ताकि दुनिया हमारी सबसे बेहतर प्रस्तुति का अनुभव कर सके। मुगल-ए-आजमरू द म्यूजिकल वास्तव में भारत का गर्व है. पूरी टीम की ओर से मैं इस सम्मान के लिए भारतीय दर्शकों और ब्रॉडवे वर्ल्ड को धन्यवाद देना चाहता हूं।’
दीपेश साल्गिया (क्रिएटिव एंड स्ट्रैटेजिक विजनः मुगल-ए-आजम) कहते हैं, ‘आपके पहले थियेटर प्रोड्क्शन के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलना एक दुर्लभ उपलब्धि है। यह शापोर जी पालोन जी और पूरे मुगल-ए-आजम टीम के लिए गर्व का क्षण है।

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छिपा ली हँसते हुए पेट की मरोड़….

नई दिल्लीः जन सामना ब्यूरो। भारतीय साहित्यिक विकास मंच और अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सभा- दिल्ली शाखा के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली के श्रीनिवासपुरी में आयोजित काव्य गोष्ठी /निशिस्त का शानदार आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता बेहतरीन शायर आदरणीय मनोज बेताब ने की एवं मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई दूरदर्शन प्रोग्राम मेनेजर श्रीकांत सक्सेना ने विशिष्ठ अतिथि रहे मशहूर शायर कमर बादरपुरी एवं यशपाल सिंह कपूर एवं अहिसास समूह के संगठन सचिव वीरेंद्र बत्रा । सभी अतिथियों द्वारा माँ शारदे के चित्र के समुख दीप प्रज्ज्वलि करने के उपरान्त दो सरस्वती पुत्रियों भव्या शर्मा एवं निशिता शर्मा दोनों बालिकाओं ने माँ शारदे की वंदना सुन्दर स्वर में की। विशिष्ठ अतिथि वीरेंद्र बत्रा ने अहिसास समूह के बारे में सभी साथियों को बतलाया कि यह साहित्यिक संस्था किस प्रकार से साहित्य को समर्पित हैं। दिल्ली और उसके आस पास से काव्य संध्या में आये लगभग 50 से अधिक कवि कवियत्रियों ने अपना शानदार काव्य पाठ किया। देश के जाने माने शायरों और कवियों की उपस्थिति ने समारोह को भव्यता प्रदान की। मुम्बई से त्रिभवन काल, लखनऊ से भुपेन्द्र सिंह, सिरसा से गोबिन्द चांदना और सुरेन्द्र इंसान तशरीफ लाए तो गाजियाबाद से जगदीश मीणा जी, दीपक भारतवासी, प्रभा शर्मा ने समारोह को गौरान्वित किया। फरीदाबाद से जाने माने शायर संजय तन्हा, अजय अक्स जी, अनहद गुँजन और नोएडा से सूक्ष्मलता महाजन की शानदार उपस्थिति दर्ज हुई। कार्यक्रम के आयोजक के तौर पर आदरणीय विजय स्वर्णकार, गुरचरन मेहता, फैज बदायूनी, माधुरी स्वर्णकार और ममता लड़ीवाल का योगदान सराहनीय रहा। दिल्ली से जनाब समर बुगारस्वी, कवि एवं पत्रकार संजय कुमार गिरि, गौरव त्रिवेदी, वीरेंद्र बत्रा, राजेश मयंक, भुपेन्द्र राघव, चैतन्य चन्दन, मजाज अमरोही साहब, महबूब आमीन श्रीकांत सक्सेना, प्रेम बरेलवी, यशपाल कपूर, रेणुजा सारस्वत, दिनेश उपाध्याय कमर बदरपुरी साहब, खुमार देहलवी साहब, सुन्दर सिंह , सूफी गुलफाम शाहजहाँपुरी साहब, इमरान धामपुरी, अख्तर गोरखपुरी, विनय सक्सेना ने कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ दी।
कमर बदरपुरी साहब ने अर्ज किया हरेक मिसरा लहू से सींचते हैं, गजल कहना कोई आसान है क्या…

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समाज की दशा और दिशा बदल देगीः हिंदी फीचर फिल्म- पहल

सामाजिक तानों-बानों पर यों तो ढेरों फिल्में बन चुकी हैं, परन्तु समाज को एक नई दशा और दिशा देगी हिंदी फीचर फिल्म – पहल। इक्का-दुक्का सामाजिक फिल्मों को छोड़ दें तो पता चलेगा कि इस तरह की अधिकांश फिल्में सिनेमाघरों में अपना जादू अच्छे से नहीं दिखा पाईं हैं पर वे लम्बें समय तक पसंद की गईं और की जा रही हैं। लेकिन ‘पहल’ एक ऐसी फिल्म होगी जो सिनेमाघरों में अपना भरपूर जादू भी दिखायेगी और फिल्म जगत में हमेशा एक मिसाल बनी रहेगी।
इस फिल्म में वह सब दर्शाया गया है कि कैसे एक पिछड़ा समाज निम्नस्तर से उच्चश्रेणी में पहुंच सकता है। मुख्यभूमिका में राजशेखर साहनी हैं और इनका साथ दिया है प्रियंका रघुवंशी ने इन दोनों ने ही अपनी – अपनी भूमिका उम्दा तरीके से निभाई है। कहने को लगभग दोनों ही फिल्म जगत में नवोदित हैं पर इनके अभिनय को देखकर कोई इन्हें नवसिखिया नहीं कह सकेगा।
निकट भविष्य में ढेर सारे राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में अवार्ड जीतेगी ‘पहल’… हालांकि हम शत – प्रतिशत यह दावा नहीं कर सकते कि आधुनिक शहरीजन इस फिल्म को पसंद करेंगे ही करेंगे। लेकिन अगर वे दूर देहात, जंगल, पहाड़, नदियां, तालाब देखने के शौकीन हैं अथवा थोडे – बहुत प्रकृति प्रेमी हैं तो न चाहते हुए भी शहरीजन भी इस फिल्म को देखने के लिये मजबूर हो जायेंगे।
सभी कलाकारों के अभिनय की अगर बात करें तो सारे ही कलाकारों ने कमाल का काम किया है। भले ही वे बड़े कलाकार नहीं हैं, लेकिन उनके अभिनय को देखकर फिल्म जगत के अच्छे – अच्छे दिग्गज भी सराहना करते नजर आयेंगे।

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शास्त्रीय नृत्य के जरिए बच्चों ने दिखाई नृत्य संस्कृति

इटावा, राहुल तिवारी। देश भर की नृत्य कलाओं को देखने व समझने के लिए इटावा महोत्सव के मंच पर स्थानीय संगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। नृत्य की विभिन्न विधाओं से सजी इस प्रतियोगिता की प्रथम पाली में सुगम नृत्य व शास्त्रीय नृत्य का आयोजन किया गया। देर शाम महोत्सव पंडाल में प्रदर्शनी समिति के सदस्य राजकिशोर बाजपेई ने दीप प्रज्जवलन व सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न विद्यालय के छात्र छात्राओं ने अपनी मनभावन प्रस्तुतियों के बल पर महोत्सव के मंच को शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न विधाओं से परिचित कराया। बच्चों के प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पंडाल में डटे रहे।
शनिवार की देर शाम शुरू हुए शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता के प्रथम चरण में कत्थक, मणिपुरी, ओडिसी, कुचिपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्यों के माध्यम से छात्र छात्राओं ने सभी का मन मोह लिया।

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क्रिकेट प्रतियोगिता:डीपीएस स्कूल अलीगढ़ फाईनल में

हाथरसः जन सामना ब्यूरो । सीबीएसई संबद्ध डीपीएस हाथरस द्वारा आयोजित द्वितीय न्.14 इण्टर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता के दूसरेे सेमी फाइनल मैच में डीपीएस अलीगढ़ ने विद्या सागर एकेदमी राया मथुरा को 10 विकेट से हराकर मेजबान डीपीएस हाथरस के साथ फाइनल में अपना स्थान सुरक्षित किया।टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी का गलत फैसला आज विद्या सागर एकेदमी राया मथुरा ने लिया और पूरी टीम सिद्धार्थ चैधरी की घातक गेंदबाजी के आगे मात्र 27 रन पर ही सिमट गयी। कोई भी बल्लेबाज दहाई की रन संख्या पर नहीं पहुँचा। सर्वाधिक 13 रन अतिरिक्त के रुप में आए। अक्षय वशिष्ठ ने 3/2, पवन मदन 5/3, सिद्धार्थ 2/5 विकेट लिए। जवाब में डीपीएस अलीगढ़ ने आवश्यक रन 9.5 ओवरों में ही वगैर विकेट खोए प्राप्त कर लिए। आदर्श मिश्रा ने 17 रन का योगदान दिया। मानव भारद्वाज ने 4 रन बनाए। मैच के अंत में सिद्धार्थ चैधरी को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

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इटावा की सांस्कृतिक विरासत पर भी फिल्मकारों की नजर

इटावा ब्यूरोः राहुल तिवारी। दुर्दांत डाकुओं की शरणस्थली रहा चंबल घाटी हमेशा से फिल्मकारों की पसंद रही है। डकैतों की जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं को रूपहले पर्दे पर दिखाया जा चुका है। अब जिले की सांस्कृतिक विरासत पर फिल्मकारों की नजर है और तो और जिले की धार्मिक पृष्ठभूमि भी उन्हें भा रही है। इसे दर्शकों तक पहुंचाने के लिए फिल्म निर्देशक इटावा का रुख कर रहे हैं। इसी रुख को देखते हुए गोवा में चल रहे फिल्म फेस्टिवल में उत्तर प्रदेश की पवेलियन में इटावा की फिल्मी पृष्ठ भूमि को भी दर्शाया गया है। प्रदेश सरकार की योजना है कि निर्माता-निर्देशकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश भर के पर्यटन स्थलों को फिल्मों के लिए उपयुक्त बनाया जाए।
पूर्व सपा सरकार में इटावा को फिल्मी मानचित्र के जरिए कॉर्पोरेट बाजार बनाने की कवायद की गई, जो काफी हद तक सफल भी रही। इस बीच बुलेट राजा, थोड़ा लुत्फ थोड़ा इश्क, सल्लू की शादी, नेहले पे दहला जैसी फिल्में यहां शूट हुईं। इसके अलावा कई क्षेत्रीय फिल्मों का भी सफल निर्देशन व फिल्मांकन यहां कराया गया। इन फिल्मों ने इटावा को डाकुओं की शरण स्थली से अलग हटाकर बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया।

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मि. एण्ड मिस ग्लैमर्स इंडिया का आयोजन

आगराः जन सामना ब्यूरो। के. एस. क्रिएशन फिल्मस् प्रोडक्शन, बोदला रोड, मारूति स्टेट, आगरा में मि. एण्ड मिस ग्लैमर्स इंडिया-2018 एवं डान्स कम्पीशन का बड़ी भव्यता के साथ आयोजन किया गया। उपर्युक्त कार्यक्रम में ही मम्मी – पापा, किड्स सीनियर – जूनियर के लिए ऑडीशन भी लिए गये। इस कार्यक्रम में 120 डांसर व 45 मॉडल्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्याथिति हृदेश चौधरी, अनुराधा शर्मा, रौनक सोलंकी रहे व कार्यक्रम में लव कपूर, भरत पाण्डेय, तरून, राहुल उपाध्याय, मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (युवा साहित्यकार एवं क्षेत्रीय फिल्मकलाकार), शिवम् उपस्थित रहे।

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अपनी कविताओं से कवियों ने बांधा समां

गीतकार चंदन राय को चित्रकार गब्बर सिंह ने भेज की पेंटिंग
डलमऊ, रायबरेलीः राहुल यादव। गंगा जमुनी तहजीब की धरती पर जहां एक ओर हिन्दी कविताओं की रूमानी शाम भागीरथी इंटर कालेज की जमीं थी, दूर दूर से आए कवियों ने अपनी अपनी कविताओं को पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। जिसमें कवि नरकंकाल ने अपनी हास्य रचनाओं से लोगों को खूब गुदगुदाया, साथ ही मंच पर सिया सचदेव, अंकिता सिंह, केडी शर्मा हाहाकारी, प्रमोद तिवारी, मंगल नसीम, रामबाबू सिकरवार आदि सहित तमाम कवियों ने अपनी अपनी रचना पढ़ी। कार्यक्रम का संयोजन मुम्बई के गीतकार चंदन राय ने किया व संचालन सुरेश मिश्रा ने किया।
इसी दौरान क्षेत्र के चर्चित चित्रकार लिम्का बुक आॅफ रिकार्ड धारक गब्बर सिंह ने कार्यक्रम के संयोजक मुम्बई के मशहूर गीतकार चंदन राय को अपनी बनाई स्केच पेंटिंग भेट की । जिसको देखकर मंचासीन सभी कवियों सहित पब्लिक ने भी वाही वाही की। आपको बता दें कि ये गब्बर सिंह क्षेत्र के वो चित्रकार है जो चावल से कलाकृति बनाने के लिए जाने जाते है अबतक इन्होने 14440 चावल से बना तिरंगा, 16216 चावल से बना भारत का नक्शा आदि सहित कई कलाकृतिया फेमस बनाई है जिनकी शराहना कई फेमस हस्तियां कर चुकी है, गब्बर की ये कलाकृतिया कई रिकार्डो मे भी दर्ज है ।

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